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बैंक ऑफ बड़ौदा ने तिमाही मुनाफे में रिकॉर्ड वृद्धि की

बैंक ऑफ बड़ौदा ने चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में 6,532 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 36% अधिक है। इस वृद्धि का मुख्य कारण शेयरों की बिक्री से हुई आय है। बैंक की ब्याज से होने वाली शुद्ध आय में भी वृद्धि हुई है, जबकि खराब कर्ज का अनुपात कम हुआ है। जानें बैंक के वित्तीय प्रदर्शन के अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं के बारे में।
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बैंक ऑफ बड़ौदा का तिमाही मुनाफा

बैंक ऑफ बड़ौदा ने चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में अब तक का सबसे अधिक तिमाही मुनाफा हासिल किया है। इस सरकारी बैंक का शुद्ध लाभ जुलाई से सितंबर 2026 के बीच सालाना आधार पर 36 प्रतिशत बढ़कर 6,532 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। बैंक ने शुक्रवार को अपने वित्तीय परिणामों की घोषणा की। इस मुनाफे में वृद्धि का मुख्य कारण शेयरों की बिक्री से प्राप्त आय रही। हाल ही में, बैंक ने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के आईपीओ के दौरान अपनी कुछ हिस्सेदारी बेची, जिससे उसे अच्छी रकम मिली।


ब्याज से आय में वृद्धि

दूसरी तिमाही में बैंक की ब्याज से होने वाली शुद्ध आय में भी वृद्धि हुई है। यह 9 प्रतिशत की सालाना वृद्धि के साथ 13,026 करोड़ रुपये रही। इसके अलावा, अन्य स्रोतों से होने वाली आय में लगभग 96 प्रतिशत का उछाल आया, जो बढ़कर 6,881 करोड़ रुपये हो गई। इसमें सरकारी प्रतिभूतियों और निवेश से हुई कमाई का सबसे बड़ा योगदान रहा। इस मद से बैंक को दूसरी तिमाही में 4,093 करोड़ रुपये की आय हुई, जबकि पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में यह 1,086 करोड़ रुपये थी।


ब्याज मुनाफे में गिरावट

हालांकि, बैंक के ब्याज से होने वाले मुनाफे के अंतर में थोड़ी कमी आई है। दूसरी तिमाही में शुद्ध ब्याज मार्जिन 3 आधार अंक घटकर 2.74 प्रतिशत रह गया। यह मार्जिन बताता है कि बैंक कर्ज पर मिलने वाले ब्याज और जमा पर दिए जाने वाले ब्याज के बीच कितना अंतर कमा रहा है।


खराब कर्ज का प्रावधान

इस दौरान, बैंक ने खराब कर्ज और संभावित नुकसान से निपटने के लिए अधिक राशि अलग रखी। इसके लिए किया गया प्रावधान सालाना आधार पर 93 प्रतिशत बढ़कर 2,382 करोड़ रुपये हो गया। हालांकि, यह पहली तिमाही के 6,323 करोड़ रुपये के मुकाबले कम है। नए खराब कर्ज में भी कमी आई है। दूसरी तिमाही में 2,392 करोड़ रुपये के नए कर्ज खराब श्रेणी में आए, जबकि पहली तिमाही में यह राशि 3,183 करोड़ रुपये थी।


कर्ज वसूली में सुधार

बैंक की कर्ज वसूली की स्थिति में भी सुधार देखने को मिला है। सितंबर तिमाही के अंत में कुल कर्ज में फंसे हुए कर्ज का अनुपात घटकर 1.78 प्रतिशत रह गया। यह पहली तिमाही के मुकाबले 21 आधार अंक की कमी दर्शाता है। वहीं, शुद्ध फंसे हुए कर्ज का अनुपात 13 आधार अंक घटकर 0.37 प्रतिशत पर आ गया है। खराब कर्ज का अनुपात कम होना बैंक की वित्तीय स्थिति के लिए सकारात्मक संकेत माना जाता है।


कर्ज और जमा में वृद्धि

कर्ज और जमा दोनों मोर्चों पर बैंक ने अच्छी वृद्धि दर्ज की है। सितंबर 2026 के अंत तक बैंक का कुल वैश्विक कर्ज 18.3 प्रतिशत बढ़कर 15.12 लाख करोड़ रुपये हो गया। इसमें विदेशी कारोबार से मिलने वाले कर्ज में 39.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई। देश के भीतर दिया गया कर्ज 13.5 प्रतिशत बढ़कर 11.87 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया।


कुल जमा राशि में वृद्धि

इसी अवधि में कुल जमा राशि 16.4 प्रतिशत बढ़कर 17.45 लाख करोड़ रुपये हो गई। घरेलू जमा 16.6 प्रतिशत बढ़कर 14.83 लाख करोड़ रुपये और विदेशी जमा 14.9 प्रतिशत बढ़कर 2.61 लाख करोड़ रुपये रही। घरेलू चालू और बचत खातों में जमा रकम भी 10.4 प्रतिशत बढ़कर 5.39 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई।


विभिन्न क्षेत्रों में कर्ज में वृद्धि

विभिन्न क्षेत्रों की बात करें तो बैंक का खुदरा कर्ज 18.6 प्रतिशत बढ़ा। वाहन कर्ज में 27.8 प्रतिशत, मकान गिरवी रखकर दिए जाने वाले कर्ज में 20.3 प्रतिशत, आवास कर्ज में 14.6 प्रतिशत और शिक्षा कर्ज में 9.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई। कृषि कर्ज 19 प्रतिशत बढ़कर 2.01 लाख करोड़ रुपये और छोटे व मझोले कारोबारों को दिया गया कर्ज 21.3 प्रतिशत बढ़कर 1.75 लाख करोड़ रुपये हो गया। बड़े कारोबारों को दिया गया कर्ज 6.3 प्रतिशत बढ़कर 4.25 लाख करोड़ रुपये रहा।


अनिवासी जमा में वृद्धि

इसके अलावा, बैंक ने भारतीय रिजर्व बैंक की विशेष अदला-बदली सुविधा के तहत विदेशी मुद्रा वाले अनिवासी जमा के रूप में 8.08 अरब डॉलर जुटाए हैं। कुल मिलाकर, बैंक के नतीजों में मुनाफे, कर्ज और जमा में वृद्धि के साथ-साथ खराब कर्ज के अनुपात में सुधार भी देखने को मिला है।