ब्रिक्स देशों ने एमएसएमई के लिए व्यापार वित्त में सुधार की दिशा में उठाया कदम
ब्रिक्स देशों की बैठक में एमएसएमई के लिए वित्तीय समाधान
नई दिल्ली/जयपुर, 7 अगस्त: ब्रिक्स देशों के व्यापार मंत्रियों ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को व्यापार वित्त तक बेहतर पहुंच प्रदान करने के लिए 'इनवॉइस डिस्काउंट व्यवस्था' की स्थापना पर विचार करने का निर्णय लिया है। यह निर्णय उस समय आया है जब वैश्विक स्तर पर एमएसएमई के लिए वित्त की कमी लगभग 5.7 लाख करोड़ डॉलर आंकी गई है, जो असंगठित उद्यमों को शामिल करने पर 8 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंच जाती है। व्यापार मंत्रियों ने यह स्वीकार किया कि छोटे उद्यमों के लिए सबसे बड़ी चुनौती व्यवहार्य व्यापार योजनाएं प्रस्तुत करने में असमर्थता है, जिसके कारण कड़े ऋण नियम, ऊंची ब्याज दरें, अधिक गारंटी की मांग और बाजार तक पहुंच में बाधाएं उत्पन्न होती हैं।
बैठक में इस वित्तीय अंतर को कम करने और गिरवी-आधारित ऋण प्रणाली से हटकर समावेशी और विकास-उन्मुख ऋण व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ने की प्रतिबद्धता व्यक्त की गई। इसके साथ ही, विनिमय दर के जोखिम को कम करने के लिए स्थानीय मुद्रा में वित्तपोषण के विकल्पों की खोज पर भी जोर दिया गया। ब्रिक्स व्यापार मंत्रियों की 16वीं बैठक के बाद जारी 'जयपुर सहमति' में कहा गया कि प्रस्तावित व्यवस्था के तहत व्यापार से संबंधित बकाया राशि के आधार पर वित्त उपलब्ध कराया जा सकेगा।
इस व्यवस्था के माध्यम से एमएसएमई अपनी प्राप्तियों को तुरंत नकद में परिवर्तित कर कार्यशील पूंजी जुटा सकेंगे। इस प्रक्रिया में एमएसएमई, बैंक, गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थान, बड़ी कंपनियां, बीमा और नियामक एजेंसियों की भागीदारी को भी प्रोत्साहित किया जाएगा। इस बैठक में ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, रूस, दक्षिण अफ्रीका और यूएई जैसे कई देशों के मंत्री या उनके प्रतिनिधि शामिल हुए।
बयान के अनुसार, दस्तावेज में शामिल सभी बिंदुओं पर ब्रिक्स सदस्य देशों की सहमति है, और जिन मुद्दों पर सहमति नहीं बन सकी, उन्हें इसमें शामिल नहीं किया गया है।
