भारत और पोलैंड के बीच तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता: प्रधानमंत्री टस्क
भारत-पोलैंड व्यापार मंच पर प्रधानमंत्री टस्क का संबोधन
पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने शुक्रवार को कहा कि भारत और पोलैंड को पारंपरिक व्यापार से आगे बढ़कर प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और वैमानिकी के क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा करना चाहिए, जिससे दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाएं मजबूत हो सकें। टस्क ने भारत-पोलैंड व्यापार मंच में कहा, 'अब समय आ गया है कि इन घोषणाओं को संयुक्त उद्यमों में बदला जाए।'
उन्होंने बेंगलुरु की भूमिका को वैश्विक प्रौद्योगिकी और नवाचार केंद्र के रूप में उजागर किया, यह बताते हुए कि यह स्थान कैसे लोगों, ज्ञान और उद्यमिता में निवेश के माध्यम से पूरी अर्थव्यवस्था की स्थिति को बदल सकता है। टस्क ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगस्त 2024 में वारसॉ यात्रा के दौरान भारत और पोलैंड के संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर पर ले जाने का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि कार्ययोजना में प्रौद्योगिकी सहयोग, साइबर सुरक्षा और अंतरिक्ष क्षेत्र शामिल हैं। टस्क ने यह भी कहा कि सहयोग से दोनों अर्थव्यवस्थाएं मजबूत होंगी और वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धा करने में मदद मिलेगी।
सूचना प्रौद्योगिकी और डिजिटलीकरण के क्षेत्र में पोलैंड के नेता ने भारत के बड़े आईटी सेवा क्षेत्र को अपने देश की सॉफ्टवेयर, क्लाउड समाधान, स्वचालन और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञता के साथ जोड़ने के लिए साझेदारियों का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि पोलैंड की कंपनियां विशेष समाधान और यूरोपीय बाजारों का अनुभव प्रदान कर सकती हैं, जबकि भारतीय भागीदार उत्पादन और सेवाओं का विस्तार करने में मदद कर सकते हैं।
टस्क ने डिजिटल सेवाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत के यूपीआई (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) और पोलैंड की ऑनलाइन सरकारी सेवाओं तथा 'एमओबायवाटेल' डिजिटल पहचान ऐप से दोनों देश एक-दूसरे का अनुभव साझा कर सकते हैं। उन्होंने कहा, 'हम मिलकर ऐसे सुरक्षित समाधान विकसित कर सकते हैं, जो नागरिकों और कारोबारियों के रोजमर्रा के जीवन को आसान बनाएं।'
उन्होंने जोर दिया कि डिजिटलीकरण से उत्पादकता बढ़नी चाहिए, लागत कम होनी चाहिए और सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होना चाहिए। टस्क ने कहा कि द्विपक्षीय सहयोग में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) को विशेष महत्व मिलना चाहिए। औद्योगिक स्वचालन, डेटा विश्लेषण, निदान और बुनियादी ढांचे के प्रबंधन के लिए इसके अनुप्रयोग विकसित करने के अवसर हैं।
उन्होंने छोटे और मझोले उद्यमों के लिए उपकरण विकसित करने और मशीन लर्निंग तथा डेटा विश्लेषण के क्षेत्र में विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों के बीच अधिक सहयोग का आह्वान किया। उन्होंने कहा, 'इसलिए साइबर सुरक्षा, सूचना संरक्षण और डिजिटल बुनियादी ढांचे की मजबूती एक साझा चुनौती होने के साथ-साथ नए कारोबारी अवसरों का क्षेत्र भी है।'
प्रधानमंत्री टस्क ने वैमानिकी के क्षेत्र में सहयोग के महत्व पर भी जोर दिया, विशेष रूप से भारत के चंद्रयान-3 मिशन का उल्लेख करते हुए, जो अगस्त 2023 में चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरा था। उन्होंने यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए) में पोलैंड की भागीदारी का भी जिक्र किया।
उन्होंने कहा कि पोलैंड की कंपनियों और अनुसंधान केंद्रों को इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑप्टिकल प्रणालियों, सॉफ्टवेयर, वैज्ञानिक उपकरणों और उपग्रह डेटा के विश्लेषण में विशेषज्ञता हासिल है। उन्होंने इन पूरक क्षमताओं का संयुक्त रूप से उपयोग करने का आह्वान किया। पोलैंड की अंतरिक्ष कंपनियां पहले से ही उपग्रह के कलपुर्जों, पृथ्वी के अवलोकन, नेविगेशन सॉफ्टवेयर, डेटा विश्लेषण, अंतरिक्ष सुरक्षा और दोहरे उपयोग वाले समाधानों के क्षेत्र में भारतीय भागीदारी की संभावनाएं तलाश रही हैं।
उन्होंने कहा, 'यदि हम मिलकर किसी अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष मिशन में भाग ले सकते हैं, तो हमें यहां पृथ्वी पर भी विशिष्ट औद्योगिक परियोजनाएं विकसित करनी चाहिए।' टस्क ने यह भी कहा कि दोनों देशों के स्टार्टअप और अनुसंधान दलों को निवेशकों और ग्राहकों तक पहुंच की आवश्यकता है। उन्होंने 2025 में 'बेंगलुरु टेक समिट' में पोलैंड की भागीदारी का उल्लेख किया और कहा कि उनका देश इस साल नवंबर में होने वाले आयोजन में फिर शामिल होगा। उन्होंने कहा, 'आइए, हम सिर्फ भविष्य की प्रौद्योगिकियों का इस्तेमाल न करें, बल्कि उन्हें मिलकर विकसित करें और वैश्विक बाजारों में भी मिलकर पेश करें।'
