भारत और यूरोपीय संघ के बीच निवेश संरक्षण समझौते पर बातचीत जारी
भारत-ईयू निवेश संरक्षण समझौते पर अपडेट
(राजेश राय) द हेग, 27 अक्टूबर - वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने जानकारी दी है कि भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच निवेश संरक्षण समझौते (आईपीए) पर वार्ता चल रही है। उन्होंने यह भी बताया कि भौगोलिक संकेतक (जीआई) समझौते के लिए कुछ कानूनी संशोधन आवश्यक हैं, जिन्हें मंत्रालय संसद में पेश करने की योजना बना रहा है। गोयल ने संवाददाताओं से कहा, "हम आईपीए पर बातचीत कर रहे हैं और जीआई समझौते के लिए कानूनी बदलाव करने की आवश्यकता है।"
भारत और 27 देशों के यूरोपीय संघ ने 27 जनवरी को मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर वार्ता समाप्त होने की घोषणा की थी। इसे "सभी समझौतों में सबसे बड़ा समझौता" माना जा रहा है। यूरोपीय संघ पहले से ही भारत में एक प्रमुख निवेशक है, जहां लगभग 6,000 यूरोपीय कंपनियां कार्यरत हैं।
भौगोलिक संकेतक (जीआई) उन कृषि, प्राकृतिक या निर्मित उत्पादों को संदर्भित करता है जो किसी विशेष भौगोलिक क्षेत्र से उत्पन्न होते हैं। निवेश संरक्षण समझौता विदेशी कंपनियों और निवेशकों के निवेश की सुरक्षा के लिए एक ढांचा प्रदान करता है। इसका उद्देश्य निष्पक्ष और गैर-भेदभावपूर्ण व्यवहार सुनिश्चित करना, निवेशकों को अवैध संपत्ति अधिग्रहण से बचाना और निवेश से संबंधित विवादों के समाधान के लिए तंत्र उपलब्ध कराना है।
ऐसे समझौतों से निवेशकों का विश्वास बढ़ता है, नीतिगत जोखिम कम होता है और मेज़बान देश के नियामकीय ढांचे में अधिक निश्चितता और पारदर्शिता मिलती है, जिससे सीमा पार निवेश को प्रोत्साहन मिलता है। इसी प्रकार, भारत और यूरोपीय संघ के बीच जीआई समझौते से दोनों पक्षों के बाजारों में क्षेत्र-विशेष के उत्पादों की सुरक्षा होगी। इससे उनके नामों की नकल और दुरुपयोग को रोकने में मदद मिलेगी।
इससे दार्जिलिंग चाय, बासमती चावल और भारतीय हस्तशिल्प जैसे उत्पादों को संरक्षण मिलेगा, जबकि यूरोपीय उत्पादों जैसे 'फेटा चीज़' की भी सुरक्षा होगी। गोयल ने कहा कि ये समझौते मुक्त व्यापार समझौते के लागू होने के बाद प्रभावी होंगे। मुक्त व्यापार समझौते पर दिसंबर में हस्ताक्षर होने की संभावना है और यह अगले साल मार्च या अप्रैल में लागू हो सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत की युवा और प्रतिभाशाली जनसंख्या, बढ़ता मध्यम वर्ग, तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और आधुनिक प्रौद्योगिकी को तेजी से अपनाने की प्रवृत्ति इसे निवेश के लिए एक आकर्षक गंतव्य बनाती है। मंत्री ने बताया कि वैश्विक जीडीपी के 76 प्रतिशत हिस्से वाली अर्थव्यवस्थाओं में तरजीही पहुंच मिलने से भारत के व्यापार के अवसरों में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
