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भारत का नया द्विपक्षीय निवेश संधि ढांचा: निवेशकों के हितों की सुरक्षा

भारत ने एक नया द्विपक्षीय निवेश संधि (बीआईटी) ढांचा तैयार किया है, जिसे केंद्रीय मंत्रिमंडल से मंजूरी मिलने की उम्मीद है। यह नया मॉडल निवेशकों के हितों की सुरक्षा को सुनिश्चित करेगा और वार्ता प्रक्रियाओं को सरल बनाएगा। मौजूदा ढांचे में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं, जैसे कि कर प्रावधानों को शामिल नहीं करना और स्थानीय कानूनी प्रावधानों को बाहर रखना। इसके अलावा, भारत ने हाल के वर्षों में कई देशों के साथ द्विपक्षीय निवेश संधियों पर हस्ताक्षर किए हैं। जानें इस नए ढांचे के बारे में और इसके संभावित प्रभावों के बारे में।
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नए बीआईटी ढांचे की तैयारी

भारत ने एक नया द्विपक्षीय निवेश संधि (बीआईटी) ढांचा तैयार कर लिया है, जिसे केंद्रीय मंत्रिमंडल से जल्द ही मंजूरी मिलने की उम्मीद है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, वित्त मंत्रालय ने इस मसौदे को कैबिनेट सचिवालय को भेज दिया है, जो प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में मंजूरी के लिए है। नया मॉडल भारत की वार्ता प्रक्रियाओं को सरल बनाएगा और निवेशकों के हितों की रक्षा करेगा।


पुराने मॉडल में बदलाव

वर्तमान बीआईटी मॉडल को 2015 में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृति मिली थी। नए मॉडल के निर्माण में कुछ महत्वपूर्ण लक्ष्मण रेखाएं तय की गई हैं, जिन पर सरकार समझौता नहीं करेगी। सूत्रों ने बताया कि कर से संबंधित कोई प्रावधान इस ढांचे में शामिल नहीं होगा, क्योंकि सरकार अपने कराधान के अधिकार को छोड़ने के लिए तैयार नहीं है। इसके अलावा, स्थानीय कानूनी प्रावधान भी इसमें नहीं होंगे, ताकि न्यायपालिका को द्विपक्षीय निवेश संधि से बाहर रखा जा सके।


निवेश संरक्षण संधियों का महत्व

द्विपक्षीय निवेश संधि दो देशों के बीच एक ऐसा समझौता है, जिसका उद्देश्य एक-दूसरे के क्षेत्र में निवेशकों द्वारा किए गए निवेश को बढ़ावा देना और उसकी सुरक्षा करना है। निवेशक इन संधियों के तहत किसी संप्रभु सरकार के खिलाफ मध्यस्थता का सहारा ले सकते हैं। भारत से विदेश में प्रत्यक्ष निवेश (ओडीआई) में वृद्धि के साथ, यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि विदेशी निवेश करने वाले घरेलू निवेशकों को भी सुरक्षा मिले।


पांच साल की अवधि पर विवाद

वर्तमान ढांचे के तहत, विदेशी निवेशकों को भारत के खिलाफ संधि-आधारित मध्यस्थता शुरू करने से पहले पांच साल तक इंतजार करना पड़ता है। इसका मतलब है कि यदि किसी विदेशी निवेशक का भारत के साथ विवाद होता है, तो उसे समझौते के तहत दावा पेश करने से पहले घरेलू कानूनी उपायों का सहारा लेना होगा। इस पांच साल की अवधि का विरोध बढ़ रहा है और कई पक्ष इसे कम करने की मांग कर रहे हैं।


भारत के द्विपक्षीय निवेश समझौते

हाल के वर्षों में, भारत ने इजराइल, उज्बेकिस्तान और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के साथ द्विपक्षीय निवेश संधियों पर हस्ताक्षर किए हैं। अब तक, भारत ने लगभग 90 द्विपक्षीय निवेश समझौते किए हैं। सरकार ने 2025-26 के बजट में मौजूदा ढांचे में बदलाव का प्रस्ताव रखा था। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में कहा था कि टिकाऊ विदेशी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए मौजूदा मॉडल में संशोधन किया जाएगा।


निवेश संधियों पर बातचीत

भारत इस समय कनाडा और ब्रिटेन सहित 4-5 देशों के साथ द्विपक्षीय निवेश संधि पर बातचीत कर रहा है।