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भारत का निर्यात: अमेरिका बना सबसे बड़ा बाजार, व्यापार में विविधता लाने की कोशिशें जारी

भारत का निर्यात अमेरिका के लिए एक महत्वपूर्ण बाजार बना हुआ है, जहां पिछले वित्तीय वर्ष में निर्यात में मामूली गिरावट आई है। अमेरिका के बाद UAE और चीन जैसे देशों में भी निर्यात में वृद्धि देखी गई है। भारत ने अपने निर्यात उत्पादों की विविधता बढ़ाने के साथ-साथ अन्य बड़े बाजारों के साथ व्यापार संबंधों को मजबूत करने की दिशा में कदम उठाए हैं। जानें कि कैसे भारत अपनी व्यापार नीति में बदलाव कर रहा है और जोखिम कम करने के लिए विविधता लाने की कोशिश कर रहा है।
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अमेरिका के साथ व्यापार संबंधों की मजबूती

डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ के बावजूद, भारत का निर्यात अमेरिका के लिए महत्वपूर्ण बना हुआ है। आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2025 से जून 2026 के बीच भारत के निर्यात में केवल 2% की मामूली गिरावट आई, जबकि अमेरिका का हिस्सा आज भी लगभग 20% है। यह दर्शाता है कि ट्रंप की धमकियों का व्यापार पर कोई खास असर नहीं पड़ा है।


अमेरिका बना भारत का प्रमुख निर्यात गंतव्य

2025-26 में अमेरिका ने भारत के निर्यात में सबसे बड़ा स्थान बनाए रखा, जिसमें $87.31 बिलियन का निर्यात हुआ। पिछले वित्तीय वर्ष में यह आंकड़ा $86.51 बिलियन था। इसके बाद UAE ($37.37 बिलियन) और चीन ($19.48 बिलियन) का स्थान रहा। चीन के साथ भारत के निर्यात में 42% की वृद्धि हुई है। भारत ने अपने निर्यात उत्पादों की विविधता बढ़ाई है, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक्स, इंजीनियरिंग और समुद्री उत्पाद शामिल हैं।


भारत की व्यापार नीति में बदलाव

अमेरिका की व्यापार नीति में अनिश्चितता के कारण, भारत ने अन्य बड़े बाजारों के साथ बातचीत तेज कर दी है। भारत ने UK के साथ एक व्यापार समझौता किया है, जो जुलाई में लागू हुआ। इसके अलावा, यूरोपीय संघ, ओमान और न्यूज़ीलैंड के साथ भी समझौते की प्रक्रिया चल रही है।


विविधता लाने की रणनीतियाँ

फेडरेशन ऑफ़ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइज़ेशन्स के डायरेक्टर जनरल अजय सहाय ने कहा कि उद्योग को जोखिम कम करने के लिए विविधता लाने की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिका के टैरिफ़ युद्ध ने भारतीय व्यवसायों को एक महत्वपूर्ण सबक सिखाया है।