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भारत की अर्थव्यवस्था 8% वृद्धि के करीब: शक्तिकांत दास

प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव-2 शक्तिकांत दास ने बताया कि भारत की अर्थव्यवस्था 8 प्रतिशत की वृद्धि के करीब है। उन्होंने जीएसटी, मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण और बैंकिंग सुधारों को आर्थिक वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण बताया। दास ने कहा कि भारत को कृत्रिम मेधा क्रांति का लाभ उठाना होगा और दीर्घकालिक वित्त की आवश्यकता पर जोर दिया। जानें, उन्होंने और क्या कहा और भारत की आर्थिक स्थिति के बारे में उनके विचार क्या हैं।
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भारत की आर्थिक वृद्धि की स्थिति

नई दिल्ली, चार अक्टूबर: प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव-2 शक्तिकांत दास ने रविवार को बताया कि भारत की अर्थव्यवस्था 8 प्रतिशत की वृद्धि के बहुत निकट है। उन्होंने कहा कि माल एवं सेवा कर (जीएसटी), लचीला मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण, बैंकिंग सुधार और राजकोषीय अनुशासन जैसे व्यापक सुधारों ने आर्थिक वृद्धि को मजबूती प्रदान की है। कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के पूर्व गवर्नर दास ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती इन सुधारों का परिणाम है।


वास्तविक जीडीपी वृद्धि

दास ने कहा, "यदि वित्त वर्ष 2025-26 की जुलाई-सितंबर से वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल-जून अवधि को देखें, तो भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि 8 प्रतिशत से थोड़ी अधिक है। यह मेरे कुछ महीने पहले फाइनेंशियल टाइम्स, लंदन को दिए गए बयान के अनुरूप है कि भारत 8 प्रतिशत की वृद्धि के बेहद करीब है।" जून तिमाही में भारत की जीडीपी 7.8 प्रतिशत बढ़ी, जो पूर्वानुमान से बेहतर रही। उन्होंने इस प्रदर्शन का श्रेय मजबूत घरेलू मांग और निवेश के अनुकूल माहौल को दिया।


सुधारों का महत्व

दास ने कहा, "भारत की मजबूती कोई संयोग नहीं है। यह व्यापक और एक-दूसरे को मजबूत करने वाले सुधारों का परिणाम है।" उन्होंने पिछले एक दशक में किए गए सुधारों को एक बार के उपायों से अधिक बताया, जो अर्थव्यवस्था को झटकों का सामना करने और तेजी से उबरने में मदद करते हैं। मुद्रास्फीति को नियंत्रित रखने, जीएसटी लागू करने, राजकोषीय अनुशासन, डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने और बैंकिंग क्षेत्र में सुधारों को प्रमुख कदमों में शामिल किया।


आर्थिक वृद्धि के आधार

आरबीआई के पूर्व गवर्नर ने कहा कि भारत का वित्तीय और बाहरी क्षेत्र का सतर्क प्रबंधन भी आर्थिक वृद्धि का मजबूत आधार बना है। उन्होंने निर्यात में विविधता, मुक्त व्यापार समझौतों, सेवा व्यापार में अधिशेष और विदेशी निवेश को बाहरी क्षेत्र की मजबूती के कारण बताया। आगे की राह पर दास ने कहा कि भारत को अपने विकास के महत्वपूर्ण दौर में कृत्रिम मेधा (एआई) क्रांति का लाभ उठाना होगा।


एआई रणनीति और वित्तीय क्षेत्र

दास ने बताया कि भारत की एआई रणनीति दो मुख्य स्तंभों पर आधारित है: देश में विकसित मूल एआई मॉडल और उच्च क्षमता वाली कंप्यूटिंग सुविधाओं में निवेश। उन्होंने वित्तीय क्षेत्र को और मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया, यह कहते हुए कि दीर्घकालिक वित्त और स्थायी निवेश की आवश्यकता होगी।


आत्मनिर्भरता और सतत विकास

उन्होंने कॉरपोरेट बॉण्ड बाजार, पेंशन और बीमा कोष, नगर निकायों के वित्तपोषण और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए नए वित्तपोषण माध्यमों को विकसित करने की आवश्यकता बताई। दास ने रणनीतिक आत्मनिर्भरता पर भी जोर दिया, यह स्पष्ट करते हुए कि आत्मनिर्भरता का मतलब दुनिया से अलग-थलग होना नहीं है। उन्होंने सतत विकास और जलवायु के क्षेत्र में नेतृत्व पर ध्यान देने की आवश्यकता बताई।


भविष्य की योजनाएं

इसके लिए राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन, इलेक्ट्रिक परिवहन, ऊर्जा दक्ष बुनियादी ढांचा, टिकाऊ कृषि और चक्रीय अर्थव्यवस्था जैसी पहलों को आगे बढ़ाना होगा। दास ने कहा कि 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सुधारों की गति बनाए रखना आवश्यक है। उन्होंने कहा, "भारत की रणनीति केवल तेजी से बढ़ना नहीं है, बल्कि लंबे समय में टिकाऊ और मजबूत आर्थिक वृद्धि हासिल करना है।"