भारत की अर्थव्यवस्था ने वैश्विक चुनौतियों के बीच 7.8% की वृद्धि दर्ज की
भारत की आर्थिक वृद्धि पर वैश्विक प्रभाव
अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव का प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था पर स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है। इस अनिश्चितता के बीच, भारत ने अपनी मजबूत आर्थिक प्रगति से सभी का ध्यान आकर्षित किया है। हालिया रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में भारतीय अर्थव्यवस्था ने 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर दर्ज की है, जो कि पूर्वानुमान से बेहतर है।
अर्थशास्त्रियों के अनुमानों से बेहतर प्रदर्शन
रॉयटर्स द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण में 58 अर्थशास्त्रियों ने इस अवधि के लिए भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर लगभग 7.1 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था। लेकिन वास्तविक आंकड़े ने इस अनुमान को पीछे छोड़ते हुए 0.7 प्रतिशत अधिक वृद्धि दिखाई। यह दर्शाता है कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद, भारत की आर्थिक गतिविधियाँ स्थिर और मजबूत बनी हुई हैं।
चीन के मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में सुधार के संकेत
चीन की अर्थव्यवस्था के संदर्भ में, हाल के आंकड़े मिश्रित संकेत दे रहे हैं। चीन के राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो के अनुसार, आधिकारिक विनिर्माण पीएमआई जुलाई में 49.2 से बढ़कर अगस्त में 49.8 पर पहुंच गया। यह आंकड़ा अर्थशास्त्रियों के पूर्वानुमान से बेहतर है, लेकिन यह अभी भी 50 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे है। पीएमआई में 50 से ऊपर का आंकड़ा आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि और 50 से नीचे का आंकड़ा संकुचन का संकेत देता है।
विदेशी मांग से मिली राहत
चीन के मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में सुधार का मुख्य कारण विदेशी बाजारों से मिली बेहतर मांग है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि मजबूत निर्यात मांग ने कारखाना गतिविधियों को कुछ हद तक सहारा दिया है। हालांकि, चीन की घरेलू मांग अभी भी चिंता का विषय बनी हुई है। लंबे समय से चल रही संपत्ति क्षेत्र की मंदी ने उपभोक्ता मांग और व्यापक आर्थिक गतिविधियों पर दबाव डाला है।
चीन की धीमी आर्थिक वृद्धि
चीन की अर्थव्यवस्था पर दबाव का अंदाजा अप्रैल-जून तिमाही के आंकड़ों से भी लगाया जा सकता है। इस दौरान, चीन की अर्थव्यवस्था सालाना आधार पर 4.3 प्रतिशत की दर से बढ़ी, जो तीन साल से अधिक समय में उसकी सबसे धीमी तिमाही वृद्धि रही। इस प्रकार, भारत और चीन की अर्थव्यवस्थाओं की स्थिति वर्तमान में भिन्न है। भारत मजबूत घरेलू गतिविधियों के सहारे तेज वृद्धि कर रहा है, जबकि चीन कमजोर घरेलू मांग और संपत्ति क्षेत्र की सुस्ती का सामना कर रहा है।
