भारत की ऊर्जा रणनीति में महत्वपूर्ण बदलाव: अधिक देशों से खरीदारी
भारत की ऊर्जा रणनीति में बदलाव
भू-राजनीतिक तनाव और समुद्री मार्गों में संभावित रुकावटों के चलते, भारत ने अपनी ऊर्जा नीति में महत्वपूर्ण परिवर्तन किए हैं। अब सरकार कुछ विशेष देशों पर निर्भर रहने के बजाय, विभिन्न देशों से ऊर्जा खरीदने की दिशा में बढ़ रही है, ताकि वैश्विक संकट के समय घरेलू आपूर्ति में कोई बाधा न आए।
LNG के लिए विस्तारित सप्लाई नेटवर्क
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने राज्यसभा में जानकारी दी है कि भारत अब 15 देशों से तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) खरीद रहा है, जबकि पहले यह संख्या केवल छह थी। सरकार का मानना है कि स्रोत देशों की संख्या बढ़ने से किसी एक देश या क्षेत्र पर निर्भरता कम हुई है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि इन 15 देशों से कितनी मात्रा में LNG खरीदी जा रही है।
कच्चे तेल के लिए रणनीतिक भंडारण पर ध्यान
भारत ने कच्चे तेल की खरीद के लिए अपने स्रोतों की संख्या भी बढ़ाई है। अब देश 41 देशों से कच्चा तेल खरीदता है, जबकि पहले यह संख्या 27 थी। सरकार का कहना है कि वैश्विक बाजार में अस्थिरता और आपूर्ति में रुकावट की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। इसके साथ ही, रणनीतिक पेट्रोलियम भंडारण क्षमता को बढ़ाने की योजना भी चल रही है, जिसमें आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में तीन भंडारों की कुल क्षमता 53.3 लाख टन है।
नए रिजर्व और ONGC की योजनाएँ
सरकार ने ओडिशा के चांदीखोल और कर्नाटक के पाडुर में 65 लाख टन क्षमता वाले दो वाणिज्यिक-सह-रणनीतिक भंडारों को मंजूरी दी है। हालांकि, इन परियोजनाओं की वर्तमान प्रगति और चालू होने की तारीख के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है। इसके अतिरिक्त, ONGC कर्नाटक में 17.5 लाख टन क्षमता का एक रणनीतिक रिजर्व बना रहा है, जिसमें से आधी क्षमता रणनीतिक भंडारण के लिए और बाकी व्यावसायिक उपयोग के लिए रखी जाएगी।
