भारत की जीडीपी विकास दर में वृद्धि: 7.8% की दर से आगे बढ़ा देश
भारत की जीडीपी विकास दर
भारत की जीडीपी विकास दर: पश्चिम एशिया में तनाव, मॉनसून में देरी और अनिश्चित शुल्क नीतियों के बावजूद, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (Q1) में भारत की जीडीपी विकास दर 7.8% रही है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, इस तिमाही में स्थिर मूल्यों पर वास्तविक जीडीपी ₹81.36 लाख करोड़ रहने का अनुमान है, जो पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में ₹75.46 लाख करोड़ थी।
अनुमानों को पीछे छोड़ते हुए
यह विकास दर अर्थशास्त्रियों द्वारा लगाए गए 7.4% के औसत अनुमान से कहीं अधिक है। हालांकि, यह पिछले तिमाही (Q4 FY26) के 8.6% से थोड़ी कम है, लेकिन पिछले वर्ष की समान अवधि (6.8%) की तुलना में यह काफी बेहतर है। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने भी पहले जून तिमाही के लिए 7% वृद्धि का अनुमान लगाया था। इस दौरान सांकेतिक (Nominal) जीडीपी में 10.3% की वृद्धि देखी गई।
सेवा क्षेत्र और घरेलू मांग का योगदान
वित्त मंत्रालय के अनुसार, अनिश्चित वैश्विक माहौल के बावजूद मजबूत घरेलू मांग ने आर्थिक विकास को बनाए रखा है। विनिर्माण PMI और ई-वे बिल जैसे कुछ संकेतकों में हल्की गिरावट आई है, लेकिन मजबूत घरेलू और बाहरी मांग के चलते सेवा क्षेत्र ने अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान की है। एशियाई विकास बैंक और विश्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की विकास दर 6.6% रहने का अनुमान लगाया है।
महंगाई की चुनौतियाँ
जुलाई में खुदरा मुद्रास्फीति 4.45% तक बढ़कर 19 महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गई, जो चिंता का विषय है। हालांकि, यह अभी भी आरबीआई के निर्धारित दायरे में है, लेकिन वैश्विक ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव और मौसम की अनिश्चितता से महंगाई बढ़ने का खतरा बना हुआ है। यदि कीमतें और बढ़ती हैं, तो केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में वृद्धि कर सकता है, जिससे आने वाली तिमाहियों में विकास दर प्रभावित हो सकती है।
