भारत की नई अपतटीय तेल और गैस खोज योजना: समंदर मंथन
भारत सरकार की नई योजना
नई दिल्ली: भारत सरकार ने देश के अपतटीय तेल और गैस संसाधनों की खोज के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना को मंजूरी दी है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस योजना, जिसे 'समंदर मंथन' नाम दिया गया है, के लिए 84,084 करोड़ रुपये के निवेश को स्वीकृति दी है। यह योजना वित्त वर्ष 2030-31 तक लागू होगी और इसका मुख्य उद्देश्य देश की ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करना है।
समंदर मंथन योजना का उद्देश्य
इस योजना का प्राथमिक लक्ष्य भारत के विशाल अपतटीय क्षेत्रों में तेल और गैस के भंडारों की पहचान करना और उनका दोहन करना है। सरकार का मानना है कि यह पहल प्राचीन भारतीय पौराणिक कथाओं में देवताओं और असुरों द्वारा समुद्र से अमृत निकालने की प्रक्रिया के समान है। इस योजना के माध्यम से, भारत अपनी ऊर्जा निर्भरता को कम करने और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाएगा।
योजना का वित्तीय आवंटन
मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत 84,084 करोड़ रुपये के कुल बजट में से, सरकार 50% यानी 42,042 करोड़ रुपये का योगदान देगी। बाकी 50% राशि का योगदान सार्वजनिक क्षेत्र की तेल और गैस कंपनियों द्वारा किया जाएगा। इस बड़े निवेश से अन्वेषण गतिविधियों को गति मिलेगी और नए तेल और गैस क्षेत्रों की खोज की संभावनाएं बढ़ेंगी।
कार्यान्वयन और समय-सीमा
यह योजना वित्त वर्ष 2030-31 तक लागू रहेगी। इस दौरान, विभिन्न अन्वेषण और उत्पादन (E&P) गतिविधियों को अंजाम दिया जाएगा। सरकार ने इस योजना के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए एक विस्तृत रोडमैप तैयार किया है, जिसमें नवीनतम तकनीकों और प्रौद्योगिकियों का उपयोग शामिल है।
ऊर्जा सुरक्षा पर प्रभाव
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है। 'समंदर मंथन' योजना घरेलू उत्पादन को बढ़ाकर इस निर्भरता को कम करने में मदद करेगी। इससे न केवल देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि आयात पर होने वाले खर्च में भी कमी आएगी, जिसका सकारात्मक प्रभाव अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
