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भारत की नई इस्पात नीति: प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए एआई और डेटा विश्लेषण का उपयोग

भारत की प्रस्तावित इस्पात नीति में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उन्नत डेटा विश्लेषण का उपयोग करने का सुझाव दिया गया है। इसका उद्देश्य आयात के असामान्य रुझानों की पहचान करना और घरेलू इस्पात उद्योग की प्रतिस्पर्धा को बढ़ाना है। नई नीति में घटिया इस्पात के आयात पर रोक लगाने और उच्च गुणवत्ता वाले इस्पात के निर्यात को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया गया है। इसके साथ ही, वैश्विक संरक्षणवाद के बीच भारत के इस्पात क्षेत्र को मजबूत करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
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नई इस्पात नीति का उद्देश्य

भारत की प्रस्तावित इस्पात नीति में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और उन्नत डेटा विश्लेषण का उपयोग करने का सुझाव दिया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य आयात के असामान्य रुझानों की पहचान करना और घरेलू इस्पात उद्योग की प्रतिस्पर्धा को बढ़ाना है। राष्ट्रीय इस्पात नीति विजन 2047 के मसौदे के अनुसार, अनावश्यक आयात पर निर्भरता को कम करने, भारत के इस्पात क्षेत्र को सशक्त बनाने और संबंधित विनिर्माण क्षेत्रों की प्रतिस्पर्धा और दीर्घकालिक विकास को सुनिश्चित करने के लिए एक तीन-स्तरीय रणनीति अपनाई जानी चाहिए।


नीति की आवश्यकता और मुख्य पहल

सरकार ने नई नीति का प्रस्ताव मौजूदा चुनौतियों और इस्पात क्षेत्र की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए किया है। 2017 की राष्ट्रीय इस्पात नीति की समीक्षा आवश्यक हो गई थी। इसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग और तकनीकी उन्नयन पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है। नई नीति में घरेलू उद्योग को समर्थन देने के लिए घटिया इस्पात के आयात पर रोक लगाने पर जोर दिया गया है।


आयात की चुनौतियाँ और समाधान

मसौदे में कहा गया है कि घटिया इस्पात का आयात और आयात में अचानक वृद्धि घरेलू उत्पादकों के लिए बड़ी चुनौतियाँ हैं। इन समस्याओं का समाधान करने के लिए एक मजबूत निगरानी प्रणाली की आवश्यकता है, जो जांच, प्रमाणन और उत्पाद की आवाजाही का पता लगाने पर आधारित हो। इसके साथ ही, आयात के असामान्य रुझानों की पहचान के लिए उन्नत डेटा विश्लेषण का उपयोग किया जाना चाहिए।


सुझाव और निर्यात प्रोत्साहन

नीति का मसौदा संबंधित पक्षों से सुझाव लेने के लिए जारी किया गया है। इसमें कहा गया है कि घटिया इस्पात के आयात को रोकने के उपाय जारी रहेंगे, जिसमें एआई आधारित निगरानी और अन्य सुधारात्मक उपाय शामिल हैं। इसके अलावा, उच्च गुणवत्ता वाले इस्पात के निर्यात को भी प्रोत्साहित किया जाएगा।


वैश्विक परिदृश्य और भारत का स्थान

भारत के इस्पात आयात में 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सा उन देशों का है, जिनके साथ भारत ने मुक्त व्यापार समझौते किए हैं। वैश्विक इस्पात क्षेत्र में संरक्षणवाद बढ़ रहा है, जिससे कई देश अपने घरेलू उद्योगों की रक्षा के लिए उपाय कर रहे हैं। मसौदे में अनुचित व्यापार गतिविधियों के खिलाफ समय पर और साक्ष्यों पर आधारित उपाय करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।


भविष्य की दिशा

उन्नत धातुकर्म प्रौद्योगिकियों, अनुसंधान एवं विकास, और लॉजिस्टिक्स में निवेश की आवश्यकता है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने तैयार इस्पात का शुद्ध निर्यातक बनने का लक्ष्य रखा है। हालाँकि, चालू वित्त वर्ष में भारत ने इस्पात का शुद्ध आयातक बनकर 36,193.9 करोड़ रुपये का आयात किया।