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भारत की ब्लू इकॉनमी: 2047 तक विकास की नई दिशा

भारत की ब्लू इकॉनमी, जो समुद्री संसाधनों के सही उपयोग पर केंद्रित है, 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे सातवीं शक्ति के रूप में मान्यता दी है। इस दिशा में कई क्षेत्रों में प्रगति हो रही है, लेकिन विदेशी निर्भरता और अन्य चुनौतियां भी हैं। रिपोर्ट में 2030 तक 100 अरब डॉलर के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आवश्यक कदमों का उल्लेख किया गया है। जानें कैसे भारत अपनी समुद्री अर्थव्यवस्था को सशक्त बना रहा है।
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ब्लू इकॉनमी का महत्व

केंद्र सरकार ने 'सप्तधारा' शक्तियों के माध्यम से विकसित भारत का लक्ष्य 2047 तक निर्धारित किया है, जिसमें ब्लू इकोनॉमी एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे लाल किले से संबोधित करते हुए सातवीं शक्ति के रूप में उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत समुद्री संसाधनों के सही उपयोग से विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है। हालांकि, इस दिशा में सबसे बड़ी चुनौती विदेशी निर्भरता है।


विदेशी निर्भरता की चुनौती

शिपिंग से लेकर खनिजों तक, भारत कई क्षेत्रों में विदेशी सहायता पर निर्भर है। प्रधानमंत्री मोदी ने मई 2026 में नॉर्डिक देशों का दौरा किया, जहां ग्रीन-ब्लू इकॉनमी से संबंधित समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। इन समझौतों के माध्यम से भारत इस क्षेत्र में अपनी संभावनाओं को साकार करने का प्रयास कर रहा है।


ब्लू इकॉनमी की संभावनाएं

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने मई 2025 में 'ट्रांसफॉर्मिंग इंडियाज ब्लू इकॉनमी' नामक रिपोर्ट तैयार की। इस रिपोर्ट में भारत के समुद्री संसाधनों की वर्तमान स्थिति, चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं का विस्तृत विश्लेषण किया गया। भारत की 11,098 किलोमीटर लंबी तटरेखा और 2.4 करोड़ वर्ग किलोमीटर का एक्सक्लूसिव इकॉनॉमिक जोन इसे समुद्री अर्थव्यवस्था में प्रमुख बनाता है।


सरकार के लक्ष्य

सरकार का उद्देश्य 2030 तक ब्लू इकॉनमी को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाना है। यह भारत के 'विकसित भारत 2047' विजन का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। 2023 में G20 की अध्यक्षता के दौरान, भारत ने समुद्री अर्थव्यवस्था को टिकाऊ बनाने का संकल्प लिया।


विभिन्न क्षेत्रों में प्रगति

'अर्न्स्ट एंड यंग' की रिपोर्ट के अनुसार, मत्स्य पालन क्षेत्र में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत मछली उत्पादन 17.25 मिलियन मीट्रिक टन तक पहुंच गया है। समुद्री परिवहन और शिपिंग में सागरमाला कार्यक्रम के तहत 155 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं। अपतटीय ऊर्जा क्षेत्र में भी नवीकरणीय ऊर्जा की संभावनाएं बढ़ रही हैं।


सफलता के मॉडल

ओडिशा की चिलिका झील में महिलाओं द्वारा समुद्री शैवाल की खेती एक सफल मॉडल है, जिससे 10,000 से अधिक तटीय परिवारों को लाभ हुआ है। कोच्चि बंदरगाह का 'डिजिटल ट्विन' मॉडल संचालन में सुधार लाने में मदद कर रहा है।


चुनौतियां

'अर्न्स्ट एंड यंग' की रिपोर्ट में मछली पकड़ने के क्षेत्र में ओवरफिशिंग और प्रदूषण की समस्याओं का उल्लेख किया गया है। इसके अलावा, शिपिंग क्षेत्र में लॉजिस्टिक्स लागत और प्रशिक्षित तकनीशियनों की कमी भी एक बड़ी चुनौती है।


वित्तीय संसाधन

रिपोर्ट में ब्लू बॉंड्स, सार्वजनिक-निजी भागीदारी और अन्य वित्तीय विकास संस्थानों के माध्यम से वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता पर चर्चा की गई है।


भविष्य की उम्मीदें

रिपोर्ट में 2035 तक एक रोडमैप तैयार किया गया है, जिसमें मंत्रालयों के बीच समन्वय और डिजिटल ब्लू इकॉनमी डैशबोर्ड की स्थापना का सुझाव दिया गया है।