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भारत की विनिर्माण क्षमता पर पीयूष गोयल की महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने जी20 में भारत की विनिर्माण क्षमता पर महत्वपूर्ण विचार साझा किए हैं। उन्होंने कहा कि भारत की विनिर्माण क्षमता घरेलू और वैश्विक आवश्यकताओं को पूरा करती है। गोयल ने बंधुआ मजदूरी और अधिक औद्योगिक क्षमता से संबंधित अमेरिकी जांचों का भी उल्लेख किया। जानें, कैसे भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में एक विश्वसनीय कड़ी के रूप में उभर रहा है और बंधुआ मजदूरी समाप्त करने के लिए उसकी प्रतिबद्धता।
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भारत की विनिर्माण क्षमता का मूल्यांकन

नई दिल्ली, 2 अक्टूबर - वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि जी20 की अध्यक्षता के तहत चिन्हित क्षेत्रों में भारत में संरचनात्मक रूप से अधिक विनिर्माण क्षमता नहीं है। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि देश की विनिर्माण क्षमता घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों आवश्यकताओं को पूरा करती है। अमेरिका वर्ष 2026 में जी20 की अध्यक्षता करेगा।


गोयल ने यह भी बताया कि औद्योगिक क्षमता अपने आप में कोई समस्या नहीं है। हालांकि, यदि उत्पादन कुछ क्षेत्रों में छिपी हुई सब्सिडी और सहायता के कारण केंद्रित होता है, तो इससे बाजार में विकृतियां उत्पन्न हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाना एक उचित लक्ष्य है, लेकिन इसे विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के नियमों से बाहर के उपायों के बहाने नहीं इस्तेमाल किया जाना चाहिए।


विकासशील देशों को औद्योगीकरण के लिए नीतिगत गुंजाइश बनाए रखने की आवश्यकता है। गोयल ने कहा, 'भारत की विनिर्माण क्षमता घरेलू और वैश्विक जरूरतों को पूरा करती है और जी20 अध्यक्षता द्वारा चिन्हित क्षेत्रों में कोई अतिरिक्त क्षमता नहीं है।' उन्होंने यह भी बताया कि भारत जी20 के कई सदस्यों की इस चिंता को साझा करता है कि कुछ देशों में व्यापार को विकृत करने वाली सहायता से डंपिंग और अनुचित मूल्य निर्धारण की स्थिति उत्पन्न होती है। भारत साक्ष्य आधारित डब्ल्यूटीओ उपायों, जैसे डंपिंग रोधी और प्रतिकारी शुल्क के माध्यम से इन गतिविधियों का सामना कर रहा है।


ये टिप्पणियाँ महत्वपूर्ण हैं क्योंकि अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (यूएसटीआर) ने 11 और 12 मार्च को अलग-अलग धारा 301 जांच शुरू की थी। यह जांच बंधुआ मजदूरी और अधिक औद्योगिक क्षमता से संबंधित चिंताओं के कारण 60 देशों के खिलाफ की जा रही है। बंधुआ मजदूरी से संबंधित एक जांच पूरी हो चुकी है, जिसके तहत भारत समेत कुछ देशों पर 10 प्रतिशत शुल्क लगाया गया है।


दूसरी जांच के निष्कर्ष अभी आने बाकी हैं। अमेरिका ने इस्पात, कपड़ा, एल्युमीनियम, वाहन, बैटरी, सीमेंट, रसायन, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऊर्जा उत्पाद, कांच, मशीन टूल्स, मशीनरी, अलौह धातु, कागज, प्लास्टिक, प्रसंस्कृत खाद्य एवं पेय पदार्थ, रोबोटिक्स, उपग्रह, सेमीकंडक्टर, जहाज, सौर मॉड्यूल और परिवहन उपकरण जैसे क्षेत्रों में अधिक क्षमता का मुद्दा उठाया है। वाणिज्य मंत्रालय ने गोयल के हवाले से कहा, 'भारत कई सदस्यों की इस चिंता को साझा करता है कि कुछ देशों में व्यापार की स्थिति बिगाड़ने वाली सहायता से डंपिंग और अनुचित मूल्य निर्धारण की स्थिति उत्पन्न होती है और भारत साक्ष्य के आधार पर डब्ल्यूटीओ के उपायों, जैसे डंपिंग रोधी और प्रतिकारी शुल्क के जरिये इससे निपटता है, जिनकी न्यायिक समीक्षा की जा सकती है।'


उन्होंने यह भी कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है। इसकी अर्थव्यवस्था घरेलू मांग से संचालित होती है और 1.4 अरब लोगों की आवश्यकताओं को पूरा करती है। इसके अलावा, भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में एक विश्वसनीय कड़ी के रूप में विनिर्माण मूल्य श्रृंखलाएं विकसित कर रहा है। गोयल ने विस्कॉन्सिन के मिल्वॉकी में जी20 व्यापार मंत्रियों की बैठक के अंतिम दिन भाग लिया।


वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में बंधुआ मजदूरी समाप्त करने के मुद्दे पर गोयल ने कहा कि भारत इसको खत्म करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। उन्होंने दो-स्तरीय विवाद निपटान प्रणाली को बहाल करने की भी मांग की।