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भारत के उभरते बिजनेस सेक्टर: अर्थव्यवस्था में बदलाव की ओर

भारत में कुछ नए बिजनेस सेक्टर उभर रहे हैं, जो आने वाले समय में अर्थव्यवस्था को बदलने की क्षमता रखते हैं। इनमें इलेक्ट्रॉनिक्स, रिन्यूएबल एनर्जी, इलेक्ट्रिक गाड़ियां और फार्मा उद्योग शामिल हैं। इन क्षेत्रों में तेजी से विकास हो रहा है और सरकार द्वारा भी इनका समर्थन किया जा रहा है। जानें कैसे ये नए बिजनेस भारत की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकते हैं।
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नए बिजनेस का उदय

भारत में कुछ नए व्यवसाय ऐसे हैं जो अभी पूरी तरह से विकसित नहीं हुए हैं, लेकिन भविष्य में ये देश की अर्थव्यवस्था को पूरी तरह से बदल सकते हैं। इन्हें सनराइज सेक्टर कहा जाता है। ये व्यवसाय पुरानी सोच को छोड़कर नई तकनीकों और विचारों पर आधारित हैं। जैसे कि पहले क्लीन एनर्जी और सोशल मीडिया ने दुनिया में बदलाव लाया, वैसे ही ये नए क्षेत्र भी बड़ी कमाई के अवसर प्रदान कर रहे हैं और इनमें भारी निवेश हो रहा है।


इलेक्ट्रॉनिक्स का विकास

भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स का उद्योग पिछले दशक में तेजी से बढ़ा है। पहले, हम जो इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पाद बनाते थे, उनकी कुल कीमत लगभग 1.9 लाख करोड़ रुपये थी, जो अब बढ़कर 11.3 लाख करोड़ रुपये के आसपास पहुंच गई है। इसमें मोबाइल फोन का योगदान सबसे अधिक है। भारत द्वारा निर्यात किए जाने वाले सामान की मात्रा भी पिछले कुछ वर्षों में 100 गुना से अधिक बढ़ गई है। वित्तीय वर्ष 2026 में, हमने लगभग 47.96 बिलियन डॉलर का सामान निर्यात किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 24 प्रतिशत अधिक है। अमेरिका ने अकेले हमसे लगभग 19.68 बिलियन डॉलर का सामान खरीदा है, जो पिछले वर्ष के मुकाबले लगभग दोगुना है।


सेमीकंडक्टर चिप्स का महत्व

सेमीकंडक्टर चिप्स के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए, सरकार ने इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 की शुरुआत की है। इसके लिए वित्तीय वर्ष 2026-2027 के बजट में 1000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इस मिशन के लिए कुल 76000 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं, जिसमें से 65000 करोड़ रुपये पहले ही खर्च किए जा चुके हैं। वर्तमान में 24 नई कंपनियां इस क्षेत्र में सुधार लाने के लिए काम कर रही हैं।


रिन्यूएबल एनर्जी का उदय

भारत अब रिन्यूएबल एनर्जी, जैसे सौर और पवन ऊर्जा के मामले में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश बन गया है। मार्च 2026 तक, देश में कोयला और पेट्रोल जैसे पारंपरिक ईंधनों को छोड़कर अन्य स्रोतों से 283.46 गीगावाट बिजली का उत्पादन होने लगा है। इसमें सौर ऊर्जा का योगदान 150.26 गीगावाट और पवन ऊर्जा का 56.09 गीगावाट है। भारत ने जून 2025 में पर्यावरण से संबंधित पेरिस संधि के लक्ष्यों को समय से 5 साल पहले ही पूरा कर लिया था। सरकार ने बजट 2026-2027 में रिन्यूएबल एनर्जी मंत्रालय के लिए 44614 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं, जो पिछले वर्ष के बजट से 40 प्रतिशत अधिक है।


इलेक्ट्रिक गाड़ियों की बढ़ती मांग

भारत में इलेक्ट्रिक गाड़ियों की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है। साल 2026 में 24.52 लाख इलेक्ट्रिक गाड़ियां बेची गईं, जो पिछले वर्ष की तुलना में 24.6 प्रतिशत अधिक है। इलेक्ट्रिक कारों की मांग में 83.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इलेक्ट्रिक स्कूटर और बाइक का बाजार सबसे बड़ा है, जिसमें 14 लाख से अधिक यूनिट्स बेची गई हैं। पिछले चार वर्षों में, भारत में कुल 83 लाख इलेक्ट्रिक गाड़ियां बिक चुकी हैं।


फार्मा उद्योग का विस्तार

भारत आज दवा निर्माण में एक प्रमुख देश बन चुका है और हम 191 देशों को अपनी दवाइयां निर्यात कर रहे हैं। वित्तीय वर्ष 2026 में, हमारा फार्मा निर्यात 31 बिलियन डॉलर के पार पहुंच गया है, जिसमें से आधी दवाइयां अमेरिका और यूरोप जैसे बड़े देशों में गई हैं। अस्पतालों में उपयोग होने वाले उपकरणों का व्यापार भी 2020-21 के 2.5 बिलियन डॉलर से बढ़कर 2024-25 में 4.1 बिलियन डॉलर हो गया है।