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भारत के ऊर्जा क्षेत्र में निवेश के अवसरों पर चर्चा सिंगापुर में

सिंगापुर में ‘इंडिया एनर्जी शोकेस’ कार्यक्रम में भारत के तेल और गैस क्षेत्र में निवेश के अवसरों पर चर्चा की गई। इस कार्यक्रम में भारत और सिंगापुर के बीच ऊर्जा सहयोग को बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर विचार किया गया। सचिव नीरज मित्तल ने निवेश के अवसरों और सुधारों की जानकारी साझा की, जिसमें अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के लिए विभिन्न निवेश विकल्प शामिल थे। कार्यक्रम ने भारत की ऊर्जा मांग और भविष्य के लिए रणनीतियों पर भी प्रकाश डाला।
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सिंगापुर में ‘इंडिया एनर्जी शोकेस’ का आयोजन

सिंगापुर में आयोजित ‘इंडिया एनर्जी शोकेस’ में वैश्विक ऊर्जा कंपनियों और निवेशकों ने भारत के तेल और गैस क्षेत्र में निवेश के संभावित अवसरों और सुधारों पर चर्चा की। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सचिव नीरज मित्तल ने की, जिसमें मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए।


भारत-सिंगापुर ऊर्जा सहयोग

भारत की उप उच्चायुक्त सुधि चौधरी ने ऊर्जा क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग को उजागर किया। उन्होंने बताया कि भारत और सिंगापुर की कंपनियों के बीच तेल और गैस की मूल्य श्रृंखला में साझेदारी के और अवसर मौजूद हैं। कार्यक्रम में तेल एवं गैस अन्वेषण के लिए बोली प्रक्रिया और ‘इंडिया एनर्जी वीक 2027’ के बारे में जानकारी दी गई।


बड़े निवेश अवसरों की जानकारी

सचिव नीरज मित्तल के नेतृत्व में हुई प्रस्तुति में तेल और गैस क्षेत्र में बड़े निवेश के अवसरों पर चर्चा की गई। इसमें सरकार के ‘समुद्र मंथन राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण मिशन’ के तहत तेल-गैस की खोज और उत्पादन, ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत विनिर्माण, रिफाइनिंग और गैस संबंधी बुनियादी ढांचे के क्षेत्र शामिल हैं। भारत की ऊर्जा मांग वैश्विक औसत से तीन से चार गुना तेजी से बढ़ रही है।


अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के लिए निवेश विकल्प

कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के लिए इक्विटी निवेश, संयुक्त उपक्रम, तकनीकी साझेदारी और दीर्घकालिक आपूर्ति समझौतों जैसे विकल्पों की जानकारी दी गई। हाइड्रोकार्बन महानिदेशालय के महानिदेशक श्रीकांत नागुलापल्ली ने भारत की हाइड्रोकार्बन संसाधन क्षमता और अन्वेषण संबंधी सुधारों की जानकारी साझा की।


निवेशकों के लिए अनुकूल वातावरण

कैबिनेट ने 31 जुलाई 2026 को राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण मिशन को मंजूरी दी, जिसके तहत वित्त वर्ष 2030-31 तक 8.85 अरब अमेरिकी डॉलर खर्च किए जाएंगे। कार्यक्रम में घरेलू उत्पादन बढ़ाने और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे सुधारों को भी प्रमुखता से बताया गया।


साझेदारी और सहयोग की आवश्यकता

प्रस्तुति में अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कंपनियों और भारतीय हितधारकों के बीच सहयोग के महत्व को रेखांकित किया गया। मंत्रालय ने कहा कि ‘इंडिया एनर्जी शोकेस’ ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कंपनियों और निवेशकों के साथ जुड़ने का एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया।


कार्यक्रम का समापन

कार्यक्रम का समापन सुरक्षित और टिकाऊ ऊर्जा भविष्य के लिए सहयोग और संवाद जारी रखने के महत्व पर जोर देते हुए हुआ। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय में संयुक्त सचिव (अन्वेषण) विनोद शेषन ने भी इस कार्यक्रम में भाग लिया।