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भारत के राजकोषीय घाटे में वृद्धि: वित्त वर्ष 2026-27 के आंकड़े चौंकाने वाले

भारत के राजकोषीय घाटे के ताजा आंकड़े सामने आए हैं, जिसमें वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में घाटा 7.15 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया है। यह आंकड़ा पिछले वर्ष की तुलना में बढ़ा है। साथ ही, सरकार की शुद्ध कर प्राप्तियां और खर्च में भी वृद्धि हुई है। जानें इस वित्तीय वर्ष के लक्ष्य और सरकार की योजनाओं के बारे में।
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राजकोषीय घाटे का नया आंकड़ा


नई दिल्ली: भारत की अर्थव्यवस्था से संबंधित ताजा राजकोषीय घाटे के आंकड़े सामने आए हैं। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही, यानी अप्रैल से सितंबर के बीच, केंद्र सरकार का राजकोषीय घाटा 7.15 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यह पूरे वित्त वर्ष के लिए निर्धारित लक्ष्य का 42.1 प्रतिशत है। यह जानकारी सरकार ने शुक्रवार को साझा की। पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में राजकोषीय घाटा 5.7 लाख करोड़ रुपये था।


कर प्राप्तियों में वृद्धि

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष के पहले छह महीनों में शुद्ध कर प्राप्तियां 12.8 लाख करोड़ रुपये रही हैं। पिछले वर्ष की इसी अवधि में यह आंकड़ा 12.3 लाख करोड़ रुपये था। इस प्रकार, कर से होने वाली शुद्ध आय में सालाना आधार पर 4.06 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वहीं, गैर-कर राजस्व से सरकार को अप्रैल से सितंबर के दौरान 4.8 लाख करोड़ रुपये प्राप्त हुए, जो पिछले साल की समान अवधि में 4.7 लाख करोड़ रुपये था। इस मद से होने वाली कमाई में 2.12 प्रतिशत का इजाफा हुआ है।


सरकारी खर्च में वृद्धि

सरकारी आय के साथ-साथ खर्च में भी तेजी आई है। वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही में केंद्र सरकार का कुल खर्च 25.5 लाख करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह 23 लाख करोड़ रुपये था। इस प्रकार, सरकारी खर्च में सालाना आधार पर 10.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इस दौरान पूंजीगत खर्च में भी बढ़ोतरी देखी गई। अप्रैल-सितंबर 2025 में यह 5.8 लाख करोड़ रुपये था, जो चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में बढ़कर 6.5 लाख करोड़ रुपये हो गया। इसमें लगभग 12 प्रतिशत की सालाना वृद्धि हुई है।


घाटे का लक्ष्य

केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए राजकोषीय घाटे का लक्ष्य 16.96 लाख करोड़ रुपये निर्धारित किया है, जो देश की अनुमानित जीडीपी का 4.3 प्रतिशत है। सरकार ने पहले बताया था कि चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में 7.86 लाख करोड़ रुपये का कर्ज लिया जाएगा, जिसमें 15,000 करोड़ रुपये के सॉवरेन ग्रीन बॉंड भी शामिल हैं। वित्त मंत्रालय के अनुसार, यह राशि 23 साप्ताहिक नीलामियों के माध्यम से जुटाई जाएगी। इसके साथ ही, पूरे वित्त वर्ष में दिनांकित प्रतिभूतियों के माध्यम से कुल सरकारी उधारी लगभग 15.9 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। केंद्रीय बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 17.2 लाख करोड़ रुपये उधार लेने का प्रस्ताव रखा था।