भारत के रियल एस्टेट बाजार में बिक्री में गिरावट, कीमतों में वृद्धि जारी
रियल एस्टेट में सुस्ती का दौर
नई दिल्ली: इस वर्ष की दूसरी तिमाही में भारत के रियल एस्टेट क्षेत्र में सुस्ती का अनुभव हुआ है। एनारॉक द्वारा जारी एक नई रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल से जून 2026 के बीच, देश के सात प्रमुख शहरों में घरों की बिक्री पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में छह प्रतिशत कम हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती संपत्ति की कीमतें, वैश्विक आर्थिक अस्थिरता और रोजगार से संबंधित चिंताएं खरीदारों के निर्णयों को प्रभावित कर रही हैं।
बिक्री में कमी के बावजूद कीमतों में वृद्धि
रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई, दिल्ली-एनसीआर, पुणे, बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई और कोलकाता में कुल 90,715 आवासीय इकाइयों की बिक्री हुई, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह संख्या 96,285 थी। हालांकि यह गिरावट बहुत बड़ी नहीं है, लेकिन यह संकेत देती है कि खरीदार वर्तमान में सतर्कता बरत रहे हैं और निवेश के फैसलों को टाल रहे हैं।
मकानों की कीमतों में वृद्धि का कारण
हालांकि आवासीय बिक्री में कमी आई है, लेकिन मकानों की औसत कीमतों में वृद्धि जारी है। सात प्रमुख शहरों में घरों की कीमतें औसतन सात प्रतिशत बढ़ी हैं, जिसमें दिल्ली-एनसीआर में 13 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि देखी गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि निर्माण लागत में वृद्धि और बेहतर सुविधाओं वाले प्रोजेक्ट्स के कारण कीमतों पर दबाव बना हुआ है।
वैश्विक घटनाओं का प्रभाव
एनारॉक के चेयरमैन अनुज पुरी के अनुसार, पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में कृत्रिम मेधा के प्रति अनिश्चितता ने बाजार की धारणा को प्रभावित किया है। कई संभावित खरीदार आर्थिक स्थिरता की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जिसके कारण आवासीय बाजार में मांग अपेक्षाकृत धीमी है।
कुछ शहरों में बिक्री में वृद्धि
जहां अधिकांश शहरों में बिक्री में कमी आई है, वहीं बेंगलुरु और हैदराबाद ने बेहतर प्रदर्शन किया है। बेंगलुरु में बिक्री में एक प्रतिशत और हैदराबाद में दो प्रतिशत की सालाना वृद्धि हुई है। कोलकाता में सबसे अधिक 10 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है, जो दर्शाता है कि कुछ स्थानीय बाजारों में मांग अभी भी मजबूत है।
प्रीमियम आवास की मांग में वृद्धि
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि प्रीमियम और लग्जरी आवासीय परियोजनाओं की मांग बनी हुई है। दूसरी ओर, नई परियोजनाओं की आपूर्ति सात प्रतिशत बढ़कर 1.06 लाख इकाइयों तक पहुंच गई है। बुनियादी ढांचे के विकास और रोजगार केंद्रों के आसपास स्थित प्रोजेक्ट्स खरीदारों को आकर्षित कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में आर्थिक परिस्थितियों के आधार पर बाजार की दिशा तय होगी।
