Newzfatafatlogo

भारत के सेवा क्षेत्र का निर्यात: नई ऊंचाइयों की ओर

भारत के सेवा क्षेत्र ने निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि की है, जो अब देश के कुल निर्यात का लगभग आधा हिस्सा बन चुका है। 2014-15 से 2025-26 के बीच, सेवा निर्यात में 158.1 अरब डॉलर से बढ़कर 421.3 अरब डॉलर तक पहुंचने का आंकड़ा दर्शाता है कि वैश्विक स्तर पर भारतीय सेवाओं की मांग में निरंतर वृद्धि हो रही है। वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, सूचना प्रौद्योगिकी सेवाएं इस क्षेत्र की सबसे बड़ी ताकत बनी हुई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह गति जारी रही, तो भारत का सेवा क्षेत्र और भी बड़ा बन सकता है।
 | 
भारत के सेवा क्षेत्र का निर्यात: नई ऊंचाइयों की ओर

सेवा क्षेत्र की बढ़ती भूमिका

भारत की अर्थव्यवस्था में सेवा क्षेत्र की बढ़ती ताकत अब निर्यात के आंकड़ों में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है। सूचना प्रौद्योगिकी, परामर्श सेवाएं और डिजिटल सेवाओं की वैश्विक मांग ने भारत को इस क्षेत्र में नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है। पिछले एक दशक में सेवा निर्यात का योगदान लगातार बढ़ता जा रहा है, और अब यह देश के कुल निर्यात का लगभग 50% बन चुका है।


निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि

वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2014-15 से 2025-26 के बीच भारत के सेवा क्षेत्र ने निर्यात में महत्वपूर्ण प्रगति की है। इस अवधि में, सेवा क्षेत्र की हिस्सेदारी कुल निर्यात में 33.8% से बढ़कर 48.8% तक पहुंच गई है।


सेवा निर्यात का आंकड़ा

वर्ष 2014-15 में भारत का सेवा निर्यात 158.1 अरब डॉलर था, जो 2025-26 में बढ़कर 421.3 अरब डॉलर हो गया है। यह वृद्धि दर्शाती है कि वैश्विक स्तर पर भारतीय सेवाओं की मांग में निरंतर वृद्धि हो रही है।


कोविड-19 का प्रभाव

पिछले 12 वर्षों में सेवा निर्यात ने लगातार मजबूती दिखाई है, केवल 2020-21 में कोविड महामारी के कारण अस्थायी गिरावट आई थी। महामारी के बाद, डिजिटल सेवाओं की मांग में वृद्धि हुई, जिसका सबसे बड़ा लाभ भारत को मिला।


सूचना प्रौद्योगिकी की प्रमुखता

वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, सूचना प्रौद्योगिकी सेवाएं भारत के सेवा निर्यात की सबसे बड़ी ताकत बनी हुई हैं, जिनकी हिस्सेदारी 40% से अधिक है। पेशेवर और प्रबंधन परामर्श सेवाएं भी तेजी से दूसरे सबसे बड़े योगदानकर्ता के रूप में उभरी हैं।


वैश्विक क्षमता केंद्रों का योगदान

वैश्विक क्षमता केंद्रों, जिन्हें बहुराष्ट्रीय कंपनियों के संचालन और तकनीकी सहायता केंद्र के रूप में जाना जाता है, ने भी सेवा निर्यात को नई गति दी है। बड़ी अंतरराष्ट्रीय कंपनियां भारत में अपने संचालन केंद्र स्थापित कर रही हैं, जिससे रोजगार और विदेशी आय में वृद्धि हो रही है।


औसत वार्षिक वृद्धि दर

वाणिज्य मंत्रालय ने बताया कि पिछले 12 वर्षों में सेवा निर्यात की औसत वार्षिक वृद्धि दर 9.3% रही है, जो कई विकसित अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में बेहतर मानी जा रही है।


वस्तु निर्यात में वृद्धि

सेवा क्षेत्र के साथ-साथ वस्तु निर्यात में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। 2014-15 में भारत का वस्तु निर्यात 310 अरब डॉलर था, जो 2025-26 में बढ़कर 442 अरब डॉलर तक पहुंच गया है।


कुल निर्यात का आंकड़ा

वस्तुओं और सेवाओं को मिलाकर भारत का कुल निर्यात 2014-15 के 468 अरब डॉलर से बढ़कर 2025-26 में 863 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। यह वृद्धि भारत की वैश्विक व्यापारिक स्थिति को मजबूत करने में सहायक है।


सरकार की पहल

वाणिज्य मंत्रालय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार की 12 वर्षों की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि व्यापार को आसान बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। इनमें 47 प्रक्रियाओं को सरल बनाना, विदेशी व्यापार नीति से जुड़ी प्रक्रियाओं का स्वचालन, आयातक-निर्यातक कोड की स्वतः स्वीकृति व्यवस्था और निर्यात प्रोत्साहन अभियान की शुरुआत शामिल है।


भविष्य की संभावनाएं

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि डिजिटल सेवाओं, सूचना प्रौद्योगिकी और वैश्विक क्षमता केंद्रों का विस्तार इसी गति से जारी रहा, तो आने वाले वर्षों में भारत का सेवा क्षेत्र निर्यात का और भी बड़ा आधार बन सकता है। वर्तमान आंकड़े यह संकेत देते हैं कि भारतीय सेवा क्षेत्र वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी भूमिका को लगातार मजबूत कर रहा है।