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भारत के स्मार्टफोन बाजार में गिरावट: कीमतों का असर और उपभोक्ता मांग में कमी

भारत के स्मार्टफोन बाजार में इस समय सुस्ती का दौर चल रहा है, जहां कीमतों में वृद्धि और कमजोर उपभोक्ता मांग का असर साफ दिखाई दे रहा है। जून तिमाही में चीनी कंपनियों की बाजार हिस्सेदारी में गिरावट आई है, और कुल स्मार्टफोन आपूर्ति में भी कमी आई है। रिपोर्ट के अनुसार, महंगाई के कारण ग्राहकों ने कम कीमत वाले मोबाइल फोन खरीदने से परहेज किया है। हालांकि, प्रीमियम श्रेणी के मोबाइल फोन की मांग मजबूत बनी हुई है। जानें इस स्थिति के पीछे के कारण और भविष्य की संभावनाएं।
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स्मार्टफोन बाजार में सुस्ती का दौर

भारत में स्मार्टफोन बाजार इस समय मंदी का सामना कर रहा है। लगातार बढ़ती कीमतों और कमजोर उपभोक्ता मांग के कारण मोबाइल कंपनियों के कारोबार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, जून तिमाही में चीनी मोबाइल कंपनियों की बाजार हिस्सेदारी 2020 के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। इसके साथ ही, कुल स्मार्टफोन आपूर्ति में पिछले छह वर्षों में सबसे बड़ी गिरावट देखी गई है।


बाजार में गिरावट के कारण

काउंटरपॉइंट रिसर्च की मासिक रिपोर्ट के अनुसार, जून तिमाही में भारत में स्मार्टफोन की कुल आपूर्ति में सालाना आधार पर 10 प्रतिशत की कमी आई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि बढ़ती कीमतों के कारण, विशेष रूप से कम कीमत वाले मोबाइल फोन खरीदने वाले ग्राहकों ने अपनी खरीदारी टाल दी, जिससे बाजार पर दबाव बढ़ गया।


चीनी कंपनियों की स्थिति

ओप्पो, वीवो, शाओमी, रियलमी, वनप्लस, आईक्यू और पोको जैसी चीनी कंपनियों की बिक्री का एक बड़ा हिस्सा कम कीमत वाले मोबाइल फोनों से आता है। लेकिन महंगाई और कीमतों में वृद्धि के कारण इन कंपनियों की बाजार हिस्सेदारी में कमी आई है। कई कंपनियों ने कम कीमत वाले ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए नए मॉडल पेश किए हैं, जबकि भविष्य में 5जी मोबाइल फोन की मांग बढ़ने की उम्मीद है।


मेमोरी की कीमतों में वृद्धि

रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर 2025 के बाद से मोबाइल में उपयोग होने वाली डीआरएएम और नैंड मेमोरी की कीमतों में लगभग चार गुना वृद्धि हो चुकी है। इस कारण से, अधिकांश बड़ी कंपनियों ने अपने मोबाइल फोन की कीमतें कई चरणों में बढ़ाईं। तिमाही के अंत तक औसत स्मार्टफोन की कीमत में लगभग 15 प्रतिशत की वृद्धि हुई।


बाजार पर दबाव

काउंटरपॉइंट रिसर्च के वरिष्ठ विश्लेषक प्रचिर सिंह ने कहा कि बाजार में मांग और आपूर्ति दोनों तरफ से दबाव बना हुआ है। 15,000 रुपये से कम कीमत वाले स्मार्टफोन की आपूर्ति में सालाना आधार पर 45 प्रतिशत की गिरावट आई है, जो इस श्रेणी की सबसे कमजोर स्थिति को दर्शाता है।


भविष्य की संभावनाएं

शोध निदेशक तरुण पाठक का मानना है कि यह दबाव पूरे वर्ष जारी रह सकता है। मेमोरी की कीमतें आने वाले महीनों में और बढ़ सकती हैं, जिसके कारण 2026 में कुल स्मार्टफोन बाजार में लगभग 13 प्रतिशत की गिरावट का अनुमान है।


प्रीमियम श्रेणी की मांग

हालांकि, प्रीमियम श्रेणी के मोबाइल फोन की मांग मजबूत बनी हुई है। आसान किस्तों और वित्तीय योजनाओं के कारण महंगे फोन खरीदना ग्राहकों के लिए पहले से आसान हो गया है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि मुख्य खुदरा दुकानों के माध्यम से होने वाली आधे से अधिक स्मार्टफोन बिक्री गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों या मासिक किस्त योजनाओं के जरिए हुई है।


कंपनियों की बाजार हिस्सेदारी

वीवो 18 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी के साथ पहले स्थान पर है, हालांकि इसकी कुल आपूर्ति में कमी आई है। सैमसंग एकमात्र कंपनी है जिसने सालाना आधार पर 2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की, जिसका कारण गैलेक्सी ए और प्रमुख एस श्रृंखला के मोबाइल फोनों की मजबूत मांग है।


उभरती कंपनियों की वृद्धि

नथिंग कंपनी ने सबसे तेज वृद्धि दर्ज की है, जिसकी आपूर्ति सालाना आधार पर 105 प्रतिशत बढ़ी है। इसका मुख्य कारण फोन 4ए श्रृंखला की अच्छी मांग और इंडियन प्रीमियर लीग के दौरान रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की मुख्य प्रायोजक बनने से मिली पहचान है। वहीं, 45,000 रुपये से अधिक कीमत वाले प्रीमियम मोबाइल फोनों में गूगल पिक्सल ने 68 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है।