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भारत ने कृषि सहयोग को बढ़ावा देने के लिए मलेशिया, तिमोर-लेस्त और म्यांमा के साथ वार्ता की

भारत ने कृषि क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देने के लिए मलेशिया, तिमोर-लेस्त और म्यांमा के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इन देशों के समकक्षों से मुलाकात की, जिसमें कृषि अनुसंधान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा की गई। तिमोर-लेस्त के मंत्री ने भारत के साथ संस्थागत व्यवस्था बनाने का आग्रह किया, जबकि म्यांमा के मंत्री ने आर्थिक संबंधों को मजबूत करने के लिए निवेश अवसरों का सुझाव दिया। इस वार्ता के दौरान कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई।
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कृषि क्षेत्र में द्विपक्षीय वार्ता

भारत ने कृषि क्षेत्र में सहयोग को बढ़ाने के लिए मलेशिया, तिमोर-लेस्त और म्यांमा के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय वार्ताएं की हैं। यह जानकारी एक आधिकारिक बयान में दी गई। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को यहां नौवीं आसियान-भारत कृषि एवं वानिकी मंत्रिस्तरीय बैठक (एआईएमएमएएफ) के दौरान इन तीनों देशों के समकक्षों से मुलाकात की।


एआईएमएमएएफ का आयोजन कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (डीएआरई) और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) द्वारा किया गया। बुधवार को जारी एक बयान में बताया गया कि मलेशिया के कृषि एवं खाद्य सुरक्षा मंत्री मोहम्मद बिन साबू के साथ बैठक में चौहान ने संयुक्त कृषि अनुसंधान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने के लिए प्रस्तावित सहमति ज्ञापन (एमओयू) पर चर्चा की। दोनों मंत्रियों ने यह माना कि आनुवंशिक संसाधनों के आदान-प्रदान, व्यापार और बाजार तक पहुंच से जुड़े द्विपक्षीय मुद्दों का समाधान सहयोग के माध्यम से किया जा सकता है।


बयान में कहा गया है कि तिमोर-लेस्त के कृषि, पशुधन, मत्स्य पालन एवं वानिकी मंत्री मार्कोस दा क्रूज ने भारत के साथ मजबूत संस्थागत व्यवस्था बनाने का आग्रह किया ताकि कृषि संबंधी चुनौतियों का सामना किया जा सके और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। चौहान ने तिमोर-लेस्त की सहायता के लिए वैज्ञानिकों एवं विशेषज्ञों के आदान-प्रदान और मानव संसाधन विकास के माध्यम से भारत की सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को साझा करने की प्रतिबद्धता दोहराई। दा क्रूज ने भारतीय तकनीकी एवं वैज्ञानिक विशेषज्ञों का एक दल भेजने का अनुरोध किया ताकि कृषि, वानिकी, पशुधन और जलीय कृषि क्षेत्र की जमीनी स्तर की चुनौतियों का आकलन किया जा सके।


बयान के अनुसार, म्यांमा के कृषि, पशुधन एवं सिंचाई मामलों के केंद्रीय मंत्री मिन नौंग के साथ बैठक में चौहान ने कहा कि दोनों देशों के बीच लगभग 1,600 किलोमीटर लंबी सीमा के साथ-साथ करीबी सांस्कृतिक संबंध भी हैं। दोनों पक्षों ने कृषि और संबंधित क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करने के लिए सहमति ज्ञापन (एमओयू) को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में प्रगति की बात की। उन्होंने दालों, कपास, डेयरी और कृषि शिक्षा के क्षेत्र में व्यापार बढ़ाने की संभावनाओं पर भी चर्चा की।


बयान में यह भी कहा गया कि म्यांमा की ओर से आर्थिक और कृषि संबंधों को मजबूत करने के लिए अनुकूल निवेश अवसरों का सुझाव दिया गया। इन बैठकों के दौरान डीएआरई के सचिव एवं आईसीएआर के महानिदेशक एम. एल. जाट, डीएआरई के अतिरिक्त सचिव एवं आईसीएआर के उप महानिदेशक ज्ञानेंद्र देव त्रिपाठी, अंतरराष्ट्रीय सहयोग के संयुक्त सचिव ए के साहू, आईसीएआर के सभी उप महानिदेशक और नवीन पी. सिंह के नेतृत्व वाला अंतरराष्ट्रीय संबंध दल भी उपस्थित था।