भारत ने डंपिंग रोधी शुल्क की अवधि बढ़ाई, घरेलू उद्योग की सुरक्षा के लिए कदम
डंपिंग रोधी शुल्क में वृद्धि
नई दिल्ली, चार अगस्त: भारत ने जुलाई से लागू चार वस्तुओं पर डंपिंग रोधी शुल्क की अवधि को बढ़ाने का निर्णय लिया है, जिसमें कुछ रसायन और लौह एवं इस्पात उत्पाद शामिल हैं। वित्त मंत्रालय की विभिन्न अधिसूचनाओं के अनुसार, सरकार ने एक नए उत्पाद पर भी डंपिंग रोधी शुल्क लागू किया है। ऑस्ट्रेलिया, चीन, कोलंबिया, इंडोनेशिया, जापान और रूस से आयातित 'लो ऐश मेटलर्जिकल कोक' पर पांच वर्षों के लिए यह शुल्क लगाया गया है।
वाणिज्य मंत्रालय की सिफारिशें
ये निर्णय वाणिज्य मंत्रालय की व्यापार उपचार महानिदेशालय (डीजीटीआर) की सिफारिशों पर आधारित हैं। इस संदर्भ में अधिसूचनाएं केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) द्वारा जारी की गई हैं। अनट्रीटेड फ्यूम्ड सिलिका, एरिलाइड्स, लौह, मिश्रधातु या गैर-मिश्रधातु इस्पात से बने सीमलेस ट्यूब, पाइप और खोखले प्रोफाइल तथा नॉर्मल ब्यूटेनॉल पर डंपिंग रोधी शुल्क की अवधि बढ़ाई गई है।
चीन से डंपिंग की समस्या
पेंट, सौंदर्य प्रसाधन और औषधि उद्योग में उपयोग होने वाली सिलिका, रंग और प्रिंटिंग इंक में प्रयुक्त एरिलाइड्स तथा लौह और गैर-मिश्रधातु इस्पात के कुछ उत्पादों की निरंतर डंपिंग चीन की कुछ कंपनियों द्वारा की जा रही थी। वहीं, सौंदर्य प्रसाधन और फ्लेवरिंग उद्योग में उपयोग होने वाला नॉर्मल ब्यूटेनॉल मलेशिया, दक्षिण अफ्रीका और अमेरिका से कम कीमत पर आयात किया जा रहा था। एक अधिसूचना के अनुसार, 'अनट्रीटेड फ्यूम्ड सिलिका' के आयात पर डंपिंग रोधी शुल्क 10 फरवरी, 2027 तक बढ़ा दिया गया है।
डंपिंग रोधी शुल्क की अवधि
एरिलाइड्स पर यह शुल्क अगले वर्ष 13 जनवरी तक और लौह एवं इस्पात उत्पादों पर 27 जनवरी, 2027 तक बढ़ाया गया है। मेटलर्जिकल कोक पर डंपिंग रोधी शुल्क 42.95 डॉलर प्रति टन से 128.83 डॉलर प्रति टन के बीच है। नॉर्मल ब्यूटेनॉल पर डंपिंग रोधी शुल्क की अवधि भी पांच वर्षों के लिए बढ़ा दी गई है।
डंपिंग रोधी जांच का महत्व
सस्ते आयात में वृद्धि से घरेलू उद्योग को होने वाले नुकसान का पता लगाने के लिए देश डंपिंग रोधी जांच करते हैं। इसके परिणामस्वरूप, वे जिनेवा स्थित विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के बहुपक्षीय ढांचे के तहत डंपिंग रोधी शुल्क लगाते हैं। इस शुल्क का उद्देश्य निष्पक्ष व्यापार व्यवस्था सुनिश्चित करना और घरेलू उत्पादकों तथा विदेशी उत्पादकों एवं निर्यातकों के बीच समान प्रतिस्पर्धी माहौल उपलब्ध कराना है।
भारत और डब्ल्यूटीओ सदस्यता
भारत और ये सभी देश डब्ल्यूटीओ के सदस्य हैं। भारत, चीन सहित विभिन्न देशों से होने वाले सस्ते आयात से निपटने के लिए पहले भी कई उत्पादों पर डंपिंग रोधी शुल्क लगा चुका है। डीजीटीआर का उद्देश्य सीमा शुल्क अधिनियम और डब्ल्यूटीओ के प्रावधानों के तहत पारदर्शी एवं समयबद्ध जांच के माध्यम से डंपिंग और सब्सिडी जैसे व्यापार-विकृत करने वाले प्रभावों से घरेलू उद्योग की रक्षा करना और सरकार से आवश्यक शुल्क लगाने की सिफारिश करना है।
