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भारत ने शुरू किया स्वदेशी डिजिटल समय नेटवर्क, तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम

भारत ने एक स्वदेशी डिजिटल समय नेटवर्क की शुरुआत की है, जो तकनीकी आत्मनिर्भरता और डिजिटल सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण है। यह नेटवर्क व्हाइट रैबिट तकनीक पर आधारित है और बेंगलुरु में स्थापित किया गया है। इसका उद्देश्य एक सटीक और विश्वसनीय समय स्रोत प्रदान करना है, जिससे देश की डिजिटल सेवाओं की सुरक्षा बढ़ेगी। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने इस पहल को उपभोक्ता हितों की रक्षा और साइबर सुरक्षा को मजबूत करने में सहायक बताया।
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भारत का नया डिजिटल समय नेटवर्क

भारत ने डिजिटल सुरक्षा और तकनीकी आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल की है। केंद्र सरकार ने एक ऐसा प्रदर्शन नेटवर्क स्थापित किया है, जो सुरक्षित और बिना किसी छेड़छाड़ के भारतीय मानक समय प्रदान करेगा। यह प्रणाली व्हाइट रैबिट तकनीक पर आधारित है, जो अत्यधिक सटीक समय समन्वय में सक्षम मानी जाती है.


प्रोजेक्ट की शुरुआत

इस नेटवर्क का उद्घाटन बेंगलुरु में स्थित क्षेत्रीय संदर्भ मानक प्रयोगशाला में किया गया है। यह केंद्र सरकार की "एक देश, एक समय" पहल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस परियोजना को उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय, सीएसआईआर-राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने मिलकर विकसित किया है.


प्रमुख उद्देश्य

इस परियोजना का मुख्य लक्ष्य एक ऐसा स्वदेशी समय स्रोत तैयार करना है, जो अत्यधिक सटीक और विश्वसनीय हो। डिजिटल युग में समय की थोड़ी सी भी गड़बड़ी कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों को प्रभावित कर सकती है, जैसे कि बैंकिंग लेनदेन, शेयर बाजार, दूरसंचार नेटवर्क, बिजली वितरण प्रणाली और परिवहन सेवाएं.


विदेशी सेवाओं पर निर्भरता कम करना

वर्तमान में, कई डिजिटल प्रणालियां समय के समन्वय के लिए विदेशी उपग्रह आधारित सेवाओं, जैसे जीपीएस, पर निर्भर करती हैं। सरकार का मानना है कि स्वदेशी समय वितरण प्रणाली विकसित करने से महत्वपूर्ण सेवाओं की सुरक्षा और मजबूती बढ़ेगी, जिससे बाहरी स्रोतों पर निर्भरता कम होगी.


सटीकता और तकनीकी क्षमता

इस नई प्रणाली में भारतीय मानक समय को देश की आधिकारिक समय निर्धारण संस्था यूटीसी (एनपीएलआई) से जोड़ा गया है। व्हाइट रैबिट तकनीक की मदद से यह नेटवर्क अत्यंत सटीकता के साथ समय का वितरण कर सकता है, जो दुनिया भर में उच्च सटीकता वाले नेटवर्क तालमेल के लिए उपयोग की जाती है.


सफल परीक्षण

इस परियोजना के तहत उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय, सीएसआईआर-राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला, इसरो, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज और भारत संचार निगम लिमिटेड ने मिलकर समय संचार की जांच सफलतापूर्वक पूरी की है, जो बेंगलुरु की प्रयोगशाला और चेन्नई स्थित नेशनल स्टॉक एक्सचेंज केंद्र के बीच की गई.


केंद्रीय मंत्री का बयान

केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि यह भरोसेमंद और स्वदेशी राष्ट्रीय समय स्रोत अब डिजिटल ढांचे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनता जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि यह व्यवस्था उपभोक्ता हितों की रक्षा, निष्पक्ष व्यापार, साइबर सुरक्षा और डिजिटल अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में सहायक होगी.


भारत का लक्ष्य

यह पहल भारत सरकार के विकसित भारत अभियान और तकनीकी आत्मनिर्भरता के लक्ष्य से भी जुड़ी हुई है। कुछ चुनिंदा देशों के पास ही ऐसी सटीक समय वितरण क्षमता उपलब्ध है। भारत का उद्देश्य अपनी स्वतंत्र और सुरक्षित समय प्रणाली विकसित कर वैश्विक स्तर पर अपनी तकनीकी क्षमता को और मजबूत करना है.