भारत-ब्रिटेन के बीच नए व्यापार समझौते की शुरुआत
भारत और ब्रिटेन के बीच आर्थिक संबंधों का नया अध्याय
भारत और ब्रिटेन के बीच आर्थिक और व्यापारिक संबंधों में एक नई दिशा का आगाज़ होने जा रहा है। दोनों देशों के बीच हुआ महत्वाकांक्षी व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता (CETA) 15 जुलाई, 2026 से औपचारिक रूप से लागू होगा। पिछले साल 25 जुलाई, 2025 को कई दौर की जटिल वार्ताओं के बाद इस ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में लागू होने वाला छठा मुक्त व्यापार समझौता (FTA) है। इससे पहले भारत ने मॉरीशस, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), ऑस्ट्रेलिया, यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) और ओमान के साथ भी ऐसे समझौतों को सफलतापूर्वक लागू किया है.
समझौते के लाभ
यह समझौता हाल के वर्षों में सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक समझौतों में से एक माना जा रहा है। इसके लागू होने से भारत के लगभग 99 प्रतिशत निर्यात को ब्रिटेन के बाजार में बिना किसी शुल्क के पहुंच प्राप्त होगी। सीईटीए के प्रभावी होने से परिधान, वस्त्र, जूते, कालीन, प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद, अनाज, सब्जियां, फल, मसाले, मछली, मांस और इनके प्रसंस्कृत उत्पाद अब ब्रिटेन के बाजार में पूरी तरह से शुल्क-मुक्त पहुंच सकेंगे। पहले इन उत्पादों पर ब्रिटेन में चार से 16 प्रतिशत तक आयात शुल्क लगाया जाता था.
ब्रिटेन से आयात पर प्रभाव
ब्रिटेन से आयात होने वाले सेल्मन मछली, लैम्ब (भेड़ का मांस), मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, चॉकलेट, शीतल पेय, कॉस्मेटिक्स, साबुन, परफ्यूम, शेविंग क्रीम और नेल पॉलिश जैसे कई उत्पाद भारतीय बाजार में सस्ते हो सकते हैं। भारत, ब्रिटेन से आयात होने वाले चांदी पर लगने वाले शुल्क को अगले 10 वर्षों में धीरे-धीरे समाप्त करेगा। ब्रिटेन से भारत आने वाले प्रमुख आयातित उत्पादों में चांदी भी शामिल है.
वाहन क्षेत्र में शुल्क में कमी
एफटीए में भारत ने ब्रिटेन में निर्मित पूरी तरह तैयार कारों और ट्रकों पर आयात शुल्क में बड़ी कमी करने पर सहमति जताई है। यह शुल्क 110 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत किया जाएगा। यह किसी भी एफटीए में पहली बार है जब भारत ने वाहन क्षेत्र में इस तरह का निर्णय लिया है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत और ब्रिटेन के बीच कुल व्यापार 8.62 प्रतिशत बढ़कर 25.12 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया, जो वित्त वर्ष 2024-25 में 23.13 अरब डॉलर था। हालांकि, इसी अवधि में भारत का ब्रिटेन को निर्यात 7.6 प्रतिशत घटकर 13.44 अरब डॉलर रह गया, जबकि ब्रिटेन से भारत का आयात 36.11 प्रतिशत बढ़कर 11.68 अरब डॉलर हो गया.
