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भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौते से खाद्य निर्यात को मिलेगी नई गति

भारत और ब्रिटेन के बीच हाल ही में लागू हुए व्यापार समझौते से भारतीय प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों के निर्यात में वृद्धि की संभावनाएं बढ़ गई हैं। टीपीसीआई के अनुसार, इस समझौते के तहत शुल्क समाप्त होने से भारतीय उत्पादकों को प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिलेगा। जानें इस समझौते के तहत क्या-क्या बदलाव हुए हैं और इसका उद्योग पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
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भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापारिक सहयोग

भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापार समझौते के तहत, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों, झींगा और इंस्टेंट कॉफी पर शुल्क समाप्त होने से भारतीय खाद्य उत्पादों के निर्यात को ब्रिटेन के बाजार में बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। उद्योग संगठन टीपीसीआई ने यह जानकारी दी। ब्रिटेन के कुल 50.68 अरब अमेरिकी डॉलर के आयात में भारत की हिस्सेदारी मात्र 0.6 प्रतिशत है।


15 जुलाई को भारत और ब्रिटेन ने व्यापार और निवेश संबंधों को मजबूत करने के लिए व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (सीईटीए) को लागू किया। खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में व्यापार को बढ़ावा देने के लिए टीपीसीआई ने ब्रिटेन-भारत व्यापार परिषद (यूकेआईबीसी) के साथ एक समझौता किया है। टीपीसीआई के अनुसार, इस समझौते के तहत संस्थागत कारोबारी सहयोग के लिए एक विशेष ढांचा तैयार किया गया है।


इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य व्यापारियों को जोड़ना, व्यापारिक प्रतिनिधिमंडलों के दौरे को सुगम बनाना, बाजार संबंधी जानकारी साझा करना और दोनों देशों के लघु एवं मझोले उद्यमों (एसएमई) के लिए विकास के अवसर पैदा करना है। टीपीसीआई के चेयरमैन मोहित सिंघला ने कहा, "नए व्यापार ढांचे के तहत खाद्य एवं पेय क्षेत्र में वृद्धि की काफी संभावनाएं हैं। ब्रिटेन वर्तमान में सालाना 50.68 अरब अमेरिकी डॉलर के प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों का आयात करता है, जिसमें भारत की हिस्सेदारी 0.6 प्रतिशत (30.95 करोड़ अमेरिकी डॉलर) है।


इससे इस क्षेत्र में विस्तार की काफी गुंजाइश है।" उन्होंने बताया कि सीईटीए के तहत ब्रिटेन द्वारा प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों पर 70 प्रतिशत तक शुल्क, झींगा पर 4.2 से 8.5 प्रतिशत शुल्क और इंस्टेंट कॉफी पर लगने वाले शुल्क समाप्त कर दिए गए हैं। इससे भारतीय उत्पादकों को तुरंत समान प्रतिस्पर्धी अवसर मिलेंगे। उन्होंने कहा, "भारत-ब्रिटेन सीईटीए लागू होने के बाद टीपीसीआई और यूकेआईबीसी द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देने के लिए सक्रिय रूप से काम करेंगे, ताकि मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के बाद बनी गति को ठोस परिणामों में बदला जा सके।"


यह ध्यान देने योग्य है कि दोनों संगठनों ने 15 अक्टूबर को लंदन में खाद्य एवं पेय पदार्थों पर भारत-ब्रिटेन व्यापार संवर्धन कार्यक्रम का आयोजन किया था। इसमें भारत की 48 निर्यातक कंपनियों और ब्रिटेन में 150 आयातकों ने भाग लिया।