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भारत में 2027 में वेतन वृद्धि की उम्मीद: एऑन की नई रिपोर्ट

ग्लोबल प्रोफेशनल सर्विसेज फर्म एऑन की नई रिपोर्ट के अनुसार, 2027 में भारत में औसत वेतन वृद्धि 9.1% तक पहुंच सकती है। यह रिपोर्ट 45 उद्योगों की 1,200 से अधिक कंपनियों के आंकड़ों पर आधारित है। NBFC क्षेत्र में सबसे अधिक 10.1% की वृद्धि की उम्मीद है। कंपनियों को कर्मचारियों को बनाए रखने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है, जबकि AI का उपयोग भी तेजी से बढ़ रहा है। जानें इस रिपोर्ट में और क्या खास है।
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भारत में वेतन वृद्धि की संभावनाएं


भारत में कार्यरत लोगों के लिए अगले वर्ष सकारात्मक संकेत मिल सकते हैं। ग्लोबल प्रोफेशनल सर्विसेज फर्म एऑन की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2027 में कंपनियां अपने कर्मचारियों की सैलरी में औसतन 9.1% की वृद्धि कर सकती हैं। पिछले वर्ष 2026 में वेतन वृद्धि का औसत 9% था। हालांकि, यह आंकड़ा एक सर्वेक्षण पर आधारित है, और वास्तविक वृद्धि कंपनी, कर्मचारी के प्रदर्शन और पद के अनुसार भिन्न हो सकती है।


सर्वे में शामिल 45 उद्योग

एऑन ने अपनी रिपोर्ट 'Annual Salary Increase and Turnover Survey for India 2026-27' तैयार करने के लिए 45 विभिन्न उद्योगों की 1,200 से अधिक कंपनियों के आंकड़ों का विश्लेषण किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक तनाव और परिचालन लागत में वृद्धि के बावजूद, भारत में घरेलू खपत, कंपनियों के निवेश और निर्यात में वृद्धि से कारोबारी विश्वास बना हुआ है। इससे कंपनियों को कर्मचारियों पर खर्च करने और लागत को नियंत्रित रखने में मदद मिल रही है।


NBFC क्षेत्र में सबसे अधिक वेतन वृद्धि की संभावना

रिपोर्ट में 2027 के लिए कुछ प्रमुख क्षेत्रों में वेतन वृद्धि का अनुमान इस प्रकार है:


- NBFC (गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां): 10.1%
- एनर्जी सेक्टर: 9.9%
- रियल एस्टेट: 9.8%
- इंफ्रास्ट्रक्चर: 9.8%
- सभी सेक्टर का औसत: 9.1%


इन अनुमानों के अनुसार, NBFC क्षेत्र में वेतन वृद्धि की दर राष्ट्रीय औसत से एक प्रतिशत अंक अधिक रहने की संभावना है। एनर्जी, रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर में भी औसत से अधिक वेतन वृद्धि की उम्मीद जताई गई है।


2026 की तुलना में मामूली वृद्धि

एऑन की रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में कंपनियों ने औसतन 9% वेतन वृद्धि की थी, जबकि 2027 के लिए यह अनुमान 9.1% है। इसका मतलब है कि अनुमानित वृद्धि की दर में केवल 0.1 प्रतिशत अंक का अंतर है। यह संकेत देता है कि कंपनियां वेतन वृद्धि को लेकर सतर्क रहते हुए कर्मचारियों को बेहतर भुगतान देने का प्रयास कर सकती हैं।


सभी कर्मचारियों को समान वेतन वृद्धि नहीं

एऑन के टैलेंट सॉल्यूशंस इंडिया में पार्टनर और रिवॉर्ड्स कंसल्टिंग लीडर रूपांक चौधरी के अनुसार, कंपनियां वेतन बढ़ाने के लिए अब अधिक लक्षित रणनीतियों का पालन कर रही हैं। वेतन संबंधी निर्णयों में केवल कुल खर्च नहीं, बल्कि यह भी ध्यान में रखा जा रहा है कि किन कर्मचारियों, आवश्यक कौशल और महत्वपूर्ण पदों पर निवेश करने से कारोबार को अधिक लाभ होगा।


रिपोर्ट में मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी सेक्टर में गैर-योग्यता आधारित वेतन समायोजन (नॉन-मेरिट एडजस्टमेंट) में वृद्धि का भी उल्लेख है। इसमें ऐसे बदलाव शामिल हैं जो केवल कर्मचारी के प्रदर्शन पर आधारित नहीं होते, बल्कि बाजार में वेतन के स्तर, विशेष कौशल की उपलब्धता और प्रतिभाशाली कर्मचारियों को बनाए रखने की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए किए जाते हैं।


कर्मचारियों के नौकरी छोड़ने की दर में वृद्धि

एऑन की रिपोर्ट में कंपनियों के सामने कर्मचारियों को बनाए रखने की चुनौती भी सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में कर्मचारियों के नौकरी छोड़ने की दर यानी एट्रिशन रेट 18% हो गया, जो 2025 में 16.2% और 2024 में 17.1% था।


एट्रिशन रेट यह दर्शाता है कि एक निश्चित अवधि में कितने कर्मचारी कंपनी छोड़कर चले गए। 2025 में इसमें गिरावट आई थी, लेकिन 2026 में यह तीन वर्षों के आंकड़ों में सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया। ऐसे में कंपनियों को कर्मचारियों को बनाए रखने के लिए प्रतिस्पर्धी वेतन और बेहतर अवसर प्रदान करने के साथ-साथ अपने खर्चों पर भी नियंत्रण रखना होगा।


कंपनियों में AI का उपयोग बढ़ा

रिपोर्ट के अनुसार, कंपनियों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित उत्पादकता टूल्स का उपयोग बढ़ा है। 2025 में ऐसे टूल्स अपनाने वाली कंपनियों का अनुपात 46.1% था, जो 2026 में बढ़कर 56% हो गया। सर्वे में शामिल सभी प्रमुख जॉब कैटेगरी में इन टूल्स का उपयोग बढ़ने की बात कही गई है।


AI के बढ़ते उपयोग के साथ, कंपनियां कर्मचारियों के कौशल, काम करने के तरीकों और उत्पादकता पर अधिक ध्यान दे रही हैं। इसका असर वेतन संबंधी निर्णयों पर भी पड़ रहा है, जहां आवश्यक कौशल और प्रतिभाशाली कर्मचारियों को बनाए रखने को प्राथमिकता दी जा रही है।


वेज कोड के प्रभाव का आकलन आवश्यक

एऑन के टैलेंट सॉल्यूशंस इंडिया में एसोसिएट पार्टनर अमित कुमार ओटवानी के अनुसार, वेज कोड के मामले में कंपनियों को केवल नियमों का पालन करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्हें कर्मचारियों और अपनी लागत पर पड़ने वाले व्यापक प्रभाव का भी आकलन करना चाहिए। इसके साथ ही कर्मचारियों के साथ प्रभावी संवाद बनाए रखना भी आवश्यक है।