भारत में अगस्त में बिजली की मांग में रिकॉर्ड वृद्धि
अगस्त में बिजली की मांग में वृद्धि
अगस्त के महीने में भारत में गर्मी ने बिजली की व्यवस्था पर भारी दबाव डाला। इस दौरान, बिजली की अधिकतम मांग में सालाना आधार पर 12.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि खपत भी तेजी से बढ़ी। ताप विद्युत संयंत्रों में कोयले की कमी ने उत्पादन और आपूर्ति को लेकर चिंता को बढ़ा दिया है।
पांच साल में सबसे अधिक बिजली की मांग
अगस्त 2026 में भारत की अधिकतम बिजली मांग 258.27 गीगावाट रही, जो पिछले वर्ष के 229.72 गीगावाट से 12.4 प्रतिशत अधिक है। राष्ट्रीय लोड डिस्पैच सेंटर के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त 2024 में यह मांग 216.69 गीगावाट, 2023 में 236.60 गीगावाट और 2022 में 194.95 गीगावाट थी। इस प्रकार, इस साल अगस्त की मांग पिछले पांच वर्षों में सबसे अधिक दर्ज की गई।
गर्मी के कारण बिजली की आवश्यकता में वृद्धि
बिजली की मांग में वृद्धि का मुख्य कारण अगस्त में असामान्य गर्मी थी। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, अगस्त 2026 में देश का औसत तापमान 28.01 डिग्री सेल्सियस रहा, जो 1991-2020 के सामान्य स्तर से 0.67 डिग्री अधिक है। औसत न्यूनतम तापमान भी 24.36 डिग्री सेल्सियस के साथ अगस्त का रिकॉर्ड उच्च स्तर रहा। गर्म रातों के कारण एयर कंडीशनर और कूलर लंबे समय तक चलते रहे।
कोयले की कमी से बिजली संयंत्रों में संकट
बढ़ती मांग के बीच ताप विद्युत संयंत्रों में कोयले की स्थिति भी चिंता का विषय बन गई है। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के आंकड़ों के अनुसार, 31 अगस्त तक 51 संयंत्रों को गंभीर रूप से कम कोयला भंडार वाली श्रेणी में रखा गया। 25 अगस्त को ऐसे संयंत्रों की संख्या 45 थी। कुल कोयला भंडार लगभग 2.912 करोड़ टन रहा, जो निर्धारित जरूरत का केवल 47.8 प्रतिशत है और लगभग 9.3 दिनों की आपूर्ति के बराबर है।
बिजली खपत में तेजी
अगस्त में देश की कुल बिजली खपत 12.85 प्रतिशत बढ़कर 169.01 अरब यूनिट तक पहुंच गई। हालांकि, यह मांग मई 2026 में दर्ज 270.82 गीगावाट के अब तक के उच्चतम स्तर से कम रही। फिर भी, लगातार बढ़ती मांग ने बिजली उत्पादकों और ग्रिड संचालकों के लिए चुनौतियाँ बढ़ा दी हैं। खासकर शाम के समय सौर ऊर्जा उत्पादन में तेज गिरावट के दौरान पर्याप्त बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन क्षमता और कोयले की उपलब्धता बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा।
