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भारत में असंगठित कामगारों के लिए राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड की स्थापना

भारत सरकार ने असंगठित श्रमिकों और गिग कामगारों के लिए एक राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड की स्थापना की है। यह बोर्ड सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में खामियों को दूर करने के लिए विशेष योजनाएं विकसित करेगा और उनकी निगरानी करेगा। इसमें विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे, और यह केंद्र सरकार को उपयुक्त योजनाओं की सिफारिश करेगा। जानें इस बोर्ड के कार्य और इसके महत्व के बारे में।
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राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड का गठन

भारत सरकार ने असंगठित श्रमिकों और 'गिग' तथा 'प्लेटफॉर्म' कामकाजी लोगों के लिए एक राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड की स्थापना की है। यह बोर्ड सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में मौजूद खामियों को दूर करने के लिए विशेष कल्याणकारी योजनाओं का विकास करेगा, उनकी निगरानी करेगा और अन्य सिफारिशें करेगा। 'गिग' कामगार वे होते हैं, जो पारंपरिक नियोक्ता-कर्मचारी संबंधों से बाहर काम करते हैं, जबकि 'प्लेटफॉर्म' कामगार ऑनलाइन प्लेटफार्मों के माध्यम से काम करते हैं।


मंत्रालय का बयान

श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने बताया कि यह कदम भारत के बड़े अनौपचारिक कार्यबल के लिए व्यापक सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में उठाया गया है। मंत्रालय ने कहा कि यह बोर्ड सामाजिक सुरक्षा संहिता के तहत स्थापित किया गया है, जो डिजिटल 'गिग' और 'प्लेटफॉर्म' पेशेवरों को औपचारिक कल्याण व्यवस्था में शामिल करने का एक महत्वपूर्ण कदम है। इस बोर्ड की अध्यक्षता केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री करेंगे।


बोर्ड की संरचना और कार्य

इस बोर्ड में केंद्र और राज्य सरकारों, प्रमुख 'एग्रीगेटर' कंपनियों, नियोक्ताओं, नागरिक समाज संगठनों, श्रमिक संघों और 'गिग' तथा 'प्लेटफॉर्म' कामगारों के संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इसका मुख्य उद्देश्य लाखों 'गिग' और 'प्लेटफॉर्म' कामगारों के साथ-साथ पारंपरिक असंगठित श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा के अंतर को पाटने के लिए लक्षित कल्याणकारी योजनाओं का विकास करना है। राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड की बैठक साल में कम से कम तीन बार होगी।


सिफारिशें और निगरानी

यह बोर्ड केंद्र सरकार को असंगठित श्रमिकों, 'गिग' और 'प्लेटफॉर्म' कामगारों के लिए उपयुक्त योजनाओं की सिफारिश करेगा। इसके अलावा, यह संहिता के प्रशासन से संबंधित मामलों पर भी सलाह देगा। बोर्ड सामाजिक कल्याण योजनाओं की निगरानी करेगा और राज्य स्तर पर रिकॉर्ड रखने के कार्यों की समीक्षा करेगा। इसके साथ ही, यह केंद्र सरकार द्वारा सौंपे गए अन्य कार्यों को भी पूरा करेगा।