भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा देने वाला विधेयक पारित
सरकार का नया विधेयक
नई दिल्ली, 6 अगस्त: भारत सरकार ने घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन को प्रोत्साहित करने, विदेशी निवेश को आकर्षित करने और डिजिटल भुगतान में मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) के नियमों में बदलाव के लिए कराधान एवं अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 को लोकसभा में मंजूरी दे दी है। यह विधेयक 5 जून को जारी अध्यादेश का स्थान लेगा, जिसमें सरकारी प्रतिभूतियों (जी-सेक) में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) द्वारा अर्जित ब्याज और पूंजीगत लाभ पर आयकर छूट दी गई थी। इस विधेयक के माध्यम से भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007, आयकर अधिनियम, 2025 और वित्त अधिनियम, 2026 में संशोधन किया गया है.
विधेयक के प्रमुख प्रावधान
सरकार का मानना है कि ये बदलाव भारत को वैश्विक पूंजी, विनिर्माण और व्यापार के लिए एक अधिक आकर्षक और स्थिर स्थान बनाएंगे। विधेयक में भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम और आयकर अधिनियम के बीच मौजूदा कानूनी संबंध को समाप्त करने का प्रस्ताव है, जिससे सरकार को यह तय करने का अधिकार मिलेगा कि किन डिजिटल भुगतान माध्यमों पर शून्य एमडीआर लागू रहेगा.
एमडीआर और शुल्क
एमडीआर डिजिटल भुगतान (जैसे कार्ड या यूपीआई) पर व्यापारी से लिया जाने वाला शुल्क है, जो भुगतान सेवा प्रदाता बैंकों या कंपनियों को जाता है। हालांकि, विधेयक में किसी शुल्क का प्रावधान नहीं है, लेकिन यह भविष्य में कुछ यूपीआई और रुपे डेबिट कार्ड लेनदेन पर व्यापारी शुल्क लगाने का कानूनी आधार तैयार करेगा।
विदेशी निवेशकों के लिए लाभ
रियल एस्टेट निवेश ट्रस्ट (रीट) और अवसंरचना निवेश ट्रस्ट (इनविट) के निवेशकों को लाभांश पर कर छूट जारी रखने का प्रस्ताव है, भले ही परिचालन कंपनी नई कर व्यवस्था अपनाए। विधेयक में विदेशी क्लाउड कंपनियों के लिए भारतीय डेटा सेंटर के उपयोग से जुड़ी कई मंजूरियों से संबंधित शर्तें हटाने का प्रस्ताव है।
डेटा सेंटर और एआई विकास
सरकार का मानना है कि इससे देश में बड़े एआई डेटा सेंटर विकसित होंगे और निवेश में वृद्धि होगी। विधेयक में भारतीय कंपनियों के लिए मोबाइल फोन, लैपटॉप, कंप्यूटर, टैबलेट, सर्वर और इनके पुर्जों का अनुबंध आधारित विनिर्माण करने वाली विदेशी कंपनियों को मिलने वाली कर छूट को 10 वर्ष बढ़ाकर 2040-41 तक करने का प्रस्ताव है।
विशेष क्षेत्रों में कर छूट
इसके अलावा, मुंबई और सूरत के विशेष क्षेत्रों में कच्चे हीरों के कारोबार से होने वाली विदेशी कंपनियों की आय को 15 वर्ष तक कर छूट देने का प्रस्ताव है, ताकि वैश्विक हीरा व्यापार का बड़ा हिस्सा भारत की ओर आकर्षित किया जा सके.
विदेशी कंपनियों के लिए कर नियम
इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के लिए सीमा शुल्क गोदामों में रखे पुर्जों की आपूर्ति से विदेशी कंपनियों की आय को भी 15 वर्ष तक कर मुक्त करने का प्रस्ताव है। सरकार का कहना है कि डेटा सेंटर, कोष प्रबंधन और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण से जुड़े कर नियमों को सरल बनाकर कारोबार करना आसान बनाया जाएगा.
विशेषज्ञों की राय
कर विशेषज्ञों का मानना है कि इन संशोधनों से विदेशी कोष प्रबंधन गतिविधियों को भारत लाने में मदद मिलेगी और देश का निवेश माहौल मजबूत होगा। डेलॉयट इंडिया में साझेदार राजेश गांधी ने कहा कि विदेशी कोष प्रबंधकों से जुड़ा संशोधन निजी इक्विटी (पीई) फर्मों और सीमित भारतीय निवेश वाले विदेशी कोषों को बिना प्रतिकूल कर प्रभाव के अपनी कोष प्रबंधन गतिविधियां भारत में स्थानांतरित करने के लिए प्रोत्साहित कर सकता है.
