भारत में ऊर्जा भंडारण क्षमता को बढ़ावा देने के लिए नई योजना
केंद्र सरकार की नई पहल
केंद्र सरकार ने देश में बिजली भंडारण प्रणाली को सुदृढ़ करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 4 नवंबर को 14,500 करोड़ रुपये की व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (VGF) योजना को स्वीकृति दी है। इस योजना के अंतर्गत वित्त वर्ष 2030-31 तक 92 गीगावाट घंटे (GWh) की ग्रिड-स्तरीय ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित की जाएगी। इसका मुख्य उद्देश्य सौर और पवन ऊर्जा से उत्पन्न बिजली का बेहतर उपयोग करना और लोगों को चौबीसों घंटे बिजली उपलब्ध कराना है।
निवेश और आर्थिक सहायता
इस योजना के लिए कुल 97,600 करोड़ रुपये के निवेश का अनुमान है। सरकार वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक आर्थिक सहायता प्रदान करेगी। इस पहल से बिजली भंडारण से संबंधित बड़े प्रोजेक्ट्स को आर्थिक रूप से व्यवहारिक बनाने में मदद मिलेगी।
भंडारण क्षमता का विभाजन
नई योजना में 92 GWh भंडारण क्षमता को तीन भागों में बांटा गया है। इसमें 60 GWh पंप्ड हाइड्रो स्टोरेज, 30 GWh बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) और 2 GWh अन्य वैकल्पिक ऊर्जा भंडारण तकनीकों के लिए निर्धारित किया गया है।
पंप्ड हाइड्रो तकनीक में अतिरिक्त बिजली का उपयोग करके पानी को ऊंचाई पर स्थित जलाशय में पहुंचाया जाता है। आवश्यकता पड़ने पर इस पानी को नीचे गिराकर टरबाइन के माध्यम से बिजली उत्पन्न की जाती है। बैटरी स्टोरेज सिस्टम में अतिरिक्त बिजली को बैटरियों में संग्रहित किया जाता है, ताकि मांग बढ़ने या उत्पादन कम होने पर इसका उपयोग किया जा सके।
भंडारण क्षमता की भविष्यवाणी
केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) की राष्ट्रीय विद्युत योजना के अनुसार, भारत को वित्त वर्ष 2031-32 तक कुल 411.4 GWh ऊर्जा भंडारण क्षमता की आवश्यकता होगी। इसमें 236.22 GWh बैटरी स्टोरेज और 175.18 GWh पंप्ड हाइड्रो स्टोरेज शामिल हैं।
वित्त वर्ष 2029-30 तक देश की भंडारण क्षमता की आवश्यकता 336.4 GWh रहने का अनुमान है। इस प्रकार, केंद्र सरकार की नई योजना के तहत विकसित होने वाली 92 GWh क्षमता वर्ष 2032 तक अनुमानित कुल आवश्यकता का लगभग 22 प्रतिशत पूरा करने में सहायक होगी।
घरेलू उद्योग को प्रोत्साहन
सरकार ने इस योजना में स्वदेशी विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए प्रावधान किया है। इसके तहत सहायता प्राप्त करने वाली बैटरी स्टोरेज परियोजनाओं में कम से कम 40 प्रतिशत घरेलू सामग्री का उपयोग अनिवार्य होगा।
इससे देश में बैटरी और ऊर्जा भंडारण से संबंधित उपकरणों का उत्पादन बढ़ाने, घरेलू उद्योगों के लिए नए अवसर पैदा करने और आयात पर निर्भरता कम करने का लक्ष्य है।
पिछले प्रयासों का संदर्भ
सरकार पहले भी बैटरी भंडारण परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए दो योजनाएं शुरू कर चुकी है। सितंबर 2023 में 3,760 करोड़ रुपये के बजटीय समर्थन से 4 GWh बैटरी स्टोरेज क्षमता विकसित करने की योजना को मंजूरी दी गई थी।
बाद में बैटरी की कीमतों में कमी के कारण इसकी क्षमता बढ़ाकर लगभग 13.85 GWh कर दी गई। इसके बाद, जून 2025 में बिजली मंत्रालय ने 30 GWh अतिरिक्त बैटरी स्टोरेज क्षमता के लिए 5,400 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता देने का निर्णय लिया।
नवीकरणीय ऊर्जा का लाभ
देश में सौर और पवन ऊर्जा की क्षमता लगातार बढ़ रही है, लेकिन इनसे बिजली उत्पादन मौसम और प्राकृतिक परिस्थितियों पर निर्भर करता है। ऊर्जा भंडारण प्रणाली अतिरिक्त बिजली को संग्रहित करके आवश्यक समय पर उपलब्ध कराने में मदद करती है।
इससे बिजली ग्रिड पर दबाव कम होगा और आपूर्ति अधिक स्थिर बनी रहेगी। सरकार को उम्मीद है कि नई योजना से स्वच्छ ऊर्जा का बेहतर उपयोग होगा और लोगों को सस्ती, भरोसेमंद तथा चौबीसों घंटे बिजली उपलब्ध कराने के लक्ष्य को मजबूती मिलेगी।
