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भारत में एनआरआई डिपॉजिट में वृद्धि, वित्त वर्ष 27 में 15% तक पहुंचने की संभावना

भारत में गैर-निवासी भारतीयों (एनआरआई) के डिपॉजिट में वृद्धि की उम्मीद है, जो वित्त वर्ष 27 में 15% तक पहुंच सकती है। एसबीआई रिसर्च की एक नई रिपोर्ट में बताया गया है कि इस दौरान क्रेडिट वृद्धि दर भी मजबूत रहेगी। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि बड़े महानगरों में जमा बाजार सैचुरेटेड हो चुके हैं और अब जमा राशि अर्ध-शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की ओर बढ़ रही है। इसके अलावा, शहरी परिवार अपनी बचत को म्यूचुअल फंड और इक्विटी में निवेश कर रहे हैं। जानें और क्या कुछ है इस रिपोर्ट में।
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एनआरआई डिपॉजिट में वृद्धि की उम्मीद

नई दिल्ली : देश में गैर-निवासी भारतीयों (एनआरआई) और एफसीएनआर-बी के माध्यम से बैंक डिपॉजिट की वृद्धि दर वित्त वर्ष 27 में 15 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। इस दौरान क्रेडिट वृद्धि दर भी मजबूत रहने की संभावना है, जैसा कि सोमवार को जारी एक रिपोर्ट में बताया गया है।


एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार, एफसीएनआर-बी डिपॉजिट के जरिए अब तक लगभग 13-14 अरब डॉलर जुटाए जा चुके हैं, जिससे चालू वित्त वर्ष में बैंकों का डिपॉजिट आधार मजबूत हुआ है।


हालांकि, वित्त वर्ष 23 से जारी ट्रेंड के अनुसार, क्रेडिट वृद्धि दर डिपॉजिट से अधिक रहने की उम्मीद है।


30 जून को समाप्त हुए पखवाड़े में, बैंक क्रेडिट में सालाना आधार पर 18.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि कुल डिपॉजिट में 13.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जिससे क्रेडिट-डिपॉजिट का अंतर 5.3 प्रतिशत अंक तक बढ़ गया।


रिपोर्ट में कहा गया है कि यह अंतर कोविड-19 महामारी के बाद जमा राशि जुटाने और क्रेडिट की मांग में आए संरचनात्मक बदलावों को दर्शाता है, न कि लिक्विडिटी के अस्थायी असंतुलन को।


बड़े महानगरों में पारंपरिक जमा बाजार अब सैचुरेटेड हो चुके हैं, और जमा राशि में वृद्धि अब अर्ध-शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की ओर बढ़ रही है। यह परिवारों की बढ़ती आय, महिलाओं पर केंद्रित कल्याणकारी योजनाओं और बैंकिंग सेवाओं के विस्तार के कारण हो रहा है।


शहरी परिवार अब अपनी बचत को म्यूचुअल फंड और इक्विटी जैसे मार्केट-लिंक्ड इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश कर रहे हैं, जिससे बैंकिंग सिस्टम में परिवारों की जमा राशि का हिस्सा कम हो रहा है।


कर्ज देने के मामले में, रिपोर्ट में कहा गया है कि रेगुलेटरी उपायों के कारण बिना गारंटी वाले पर्सनल लोन पर रोक लगने के बाद क्रेडिट ग्रोथ का दायरा बढ़ा है।


इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम (एससीएलजीएस) के समर्थन से, नया कर्ज देने का रुझान इंडस्ट्री, इंफ्रास्ट्रक्चर, वर्किंग कैपिटल लोन और सोने के गहनों के बदले लोन की ओर बढ़ा है।


एसबीआई रिसर्च ने यह भी कहा कि आपूर्ति पक्ष के झटकों (जैसे कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और भू-राजनीतिक तनाव) का असर जमा राशि की तुलना में क्रेडिट ग्रोथ पर अधिक पड़ता है, जिससे बैंकिंग सिस्टम में लगातार लिक्विडिटी की कमी बनी रहती है।


हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारतीय बैंक अच्छी तरह से कैपिटलाइज्ड हैं, उनकी कैपिटल एडिक्वेसी मजबूत है और नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (एनपीए) कम हैं, जिससे यह सेक्टर संतुलित स्थिति में है।


रिपोर्ट के अनुसार, खपत की मांग और कैपिटल खर्च के समर्थन से क्रेडिट ग्रोथ के अच्छे बने रहने की उम्मीद है, जबकि बैंकों के बैलेंस-शीट अनुशासन बनाए रखने की संभावना है।