भारत में कंटेनर विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए 10,000 करोड़ रुपये की योजना
कंटेनर विनिर्माण प्रोत्साहन योजना की मंजूरी
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए 10,000 करोड़ रुपये की कंटेनर विनिर्माण प्रोत्साहन योजना (सीएमपीएस) को मंजूरी दी। यह योजना देश में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी कंटेनर विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने के उद्देश्य से वित्त वर्ष 2039-40 तक लागू रहेगी। आधिकारिक बयान के अनुसार, इसका मुख्य लक्ष्य कंटेनर के आयात पर निर्भरता को कम करना और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना है।
इस योजना के तहत नई विनिर्माण इकाइयों की स्थापना और मौजूदा इकाइयों की क्षमता में वृद्धि के लिए सहायता प्रदान की जाएगी। केंद्रीय बजट 2026-27 में इस योजना की घोषणा की गई थी। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में इस योजना को स्वीकृति दी गई है।
यह योजना वित्त वर्ष 2039-40 तक प्रभावी रहेगी। इसके अंतर्गत योग्य विनिर्माताओं को ब्याज सब्सिडी, परिचालन व्यय सहायता, परीक्षण एवं प्रमाणन सहायता और भूमि पट्टे पर लेने के लिए सहायता प्रदान की जाएगी। बयान में उल्लेख किया गया है कि ब्याज सब्सिडी के लिए 859 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है।
नई विनिर्माण इकाइयों की स्थापना और मौजूदा इकाइयों की क्षमता बढ़ाने के लिए पात्र सावधि ऋण पर सालाना तीन प्रतिशत ब्याज सब्सिडी दी जाएगी। परिचालन व्यय सहायता के लिए 8,891 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जिसके तहत वैश्विक नौवहन मानकों के अनुरूप निर्मित कंटेनरों पर वित्तीय सहायता दी जाएगी।
इससे घरेलू स्तर पर निर्मित कंटेनरों की लागत में कमी आएगी और उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि होगी। योजना का उद्देश्य देश की वार्षिक कंटेनर विनिर्माण क्षमता को लगभग 10 गुना बढ़ाकर 7.5 लाख टीईयू (20 फुट के बराबर कंटेनर) तक पहुंचाना है। सरकार का मानना है कि इस योजना से भारत में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी विनिर्माण आधार विकसित होगा और देश गुणवत्तापूर्ण नौवहन कंटेनरों के वैश्विक निर्यात केंद्र के रूप में उभर सकेगा।
इस योजना से लगभग 3,000 प्रत्यक्ष और 50,000 से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की उम्मीद है। इसके अलावा, कंटेनर निर्माण में उपयोग होने वाले विशेष इस्पात, कोने के हिस्से बनाने वाली ढलाई, लकड़ी के फ्रेम और पेंट जैसे सहायक उद्योगों को भी बढ़ावा मिलेगा।
