भारत में खनन और निर्माण उपकरण उद्योग की वृद्धि: 1.40 लाख इकाइयों की बिक्री
सरकारी निवेश का प्रभाव
देश में बुनियादी ढांचे के विकास के लिए सरकार के निरंतर निवेश का सकारात्मक प्रभाव अब घरेलू मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। भारतीय खनन और निर्माण उपकरण उद्योग ने वित्त वर्ष 2025-26 में 1.40 लाख से अधिक इकाइयों की बिक्री की है, जो पिछले वर्ष की तुलना में तीन प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। यह जानकारी नई दिल्ली में आयोजित 'माइनिंग एंड कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट समिट' में साझा की गई, जिसका आयोजन भारतीय उद्योग परिसंघ और भारी उद्योग मंत्रालय ने मिलकर किया था.
उद्योग की स्थिति
टीकेआईएल इंडस्ट्रीज के सीईओ विवेक भाटिया ने बताया कि खनन और निर्माण उपकरण क्षेत्र आर्थिक विकास का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बनकर उभरा है। यह क्षेत्र विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचे के विकास, खनन गतिविधियों के विस्तार, ऊर्जा सुरक्षा और प्रौद्योगिकी प्रगति के लिए आवश्यक खनिजों की उपलब्धता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
उन्होंने यह भी बताया कि उद्योग का निर्यात 31.5 प्रतिशत बढ़ा है, जो इस क्षेत्र में संरचनात्मक बदलाव का संकेत है। भारतीय निर्माता अब केवल घरेलू मांग को पूरा करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी अपनी उपस्थिति मजबूत कर रहे हैं।
भविष्य की संभावनाएँ
भाटिया ने कहा कि स्थानीयकरण में वृद्धि, उत्पाद गुणवत्ता में सुधार और प्रतिस्पर्धी मूल्य निर्धारण इस सफलता के प्रमुख कारण हैं। उन्होंने यह भी बताया कि बुनियादी ढांचे के विभिन्न क्षेत्रों में सरकारी निवेश ने इस उद्योग की वृद्धि को तेज किया है।
उद्योग तेजी से मशीनीकरण, विश्वस्तरीय उपकरणों और नवीनतम प्रौद्योगिकियों को अपनाने की दिशा में बढ़ रहा है। भाटिया ने भारत के पांच लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने और 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य की ओर बढ़ने की बात की। उन्होंने कहा कि राजमार्गों, रेलवे, बंदरगाहों, हवाई अड्डों, शहरी बुनियादी ढांचे और नवीकरणीय ऊर्जा के विकास ने इस उद्योग के लिए अभूतपूर्व अवसर पैदा किए हैं।
