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भारत में जैव ऊर्जा क्षेत्र में निवेश को मिलेगी नई गति

भारत के जैव ऊर्जा क्षेत्र में निवेश को नई गति मिलने की उम्मीद है। इंडियन बायोगैस एसोसिएशन के अनुसार, आरईआई-2026 एक्सपो में ₹2,800 करोड़ के नए निवेश की संभावना है। इस एक्सपो का आयोजन 22 से 24 अक्टूबर को ग्रेटर नोएडा में होगा, जहां जैव ऊर्जा को हरित विकास का प्रमुख साधन माना जा रहा है। जानें इस क्षेत्र में क्या बदलाव आ सकते हैं और कैसे यह योजना देश की जैव अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देगी।
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जैव ऊर्जा क्षेत्र में निवेश की नई संभावनाएं

भारत के जैव ऊर्जा क्षेत्र में निवेश को एक नई दिशा मिलने की संभावना है। इंडियन बायोगैस एसोसिएशन (आईबीए) ने बताया है कि अगले महीने होने वाले रिन्यूएबल एनर्जी इंडिया एक्सपो (आरईआई) 2026 से जैव ऊर्जा क्षेत्र में ₹2,800 करोड़ से अधिक के नए निवेश का मार्ग प्रशस्त हो सकता है। इस बार एक्सपो में जैव ऊर्जा या बायोगैस को भारत के हरित विकास के एक महत्वपूर्ण साधन के रूप में प्रमुखता दी जा रही है।


आरईआई-2026 का आयोजन 22 से 24 अक्टूबर तक ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो मार्ट एंड सेंटर में होगा। आईबीए के अनुसार, इस एक्सपो से अपेक्षित ₹2,800 करोड़ का निवेश ₹23,731 करोड़ की गोबरधन (गैल्वानाइजिंग ऑर्गेनिक बायो-एग्रो रिसोर्सेज धन) राष्ट्रीय चक्रीय जैव ऊर्जा योजना के कुल बजट का लगभग 12 प्रतिशत है। केंद्र सरकार ने अगस्त 2026 में गोबरधन योजना को स्वीकृति दी थी, जो एक सितंबर 2026 से लागू हो गई है।


यह योजना 2035-36 तक प्रभावी रहेगी और इसका उद्देश्य देश में कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) के उत्पादन को लगभग दस गुना बढ़ाना, बड़े पैमाने पर निजी निवेश को आकर्षित करना और देश में संसाधनों के अधिकतम उपयोग वाली जैव अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना है। आईबीए के अनुसार, आरईआई-2026 में निवेशकों, परियोजना डेवलपर्स, प्रौद्योगिकी प्रदाताओं और नीति-निर्माताओं को एक मंच पर लाकर नीतिगत पहलों को बड़े पैमाने पर परियोजनाओं में बदलने में सहायता मिल सकती है। इस बार एक्सपो में जैव ऊर्जा मंडप अब तक का सबसे बड़ा होगा, जिसमें 2025 की तुलना में 35 प्रतिशत अधिक प्रदर्शक शामिल होंगे।