Newzfatafatlogo

भारत में टनल बोरिंग मशीनों के विकास की दिशा में केंद्रीय मंत्री का बयान

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने हाल ही में कहा कि यदि विदेशी आपूर्तिकर्ता टनल बोरिंग मशीनें देने से मना करते हैं, तो भारत अपनी खुद की मशीनें विकसित करेगा। उन्होंने घरेलू विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ावा देने और विदेशी निर्भरता को कम करने की आवश्यकता पर जोर दिया। गोयल ने भारतीय स्टार्टअप्स की भूमिका को भी रेखांकित किया, जो 'रेयर अर्थ' के बिना उच्च गुणवत्ता वाली मोटरों का विकास कर रहे हैं। जानें उनके विचार और भारत की व्यापार नीति के बारे में।
 | 

भारत की आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि यदि विदेशी आपूर्तिकर्ता टनल बोरिंग मशीनें प्रदान करने से मना करते हैं, तो भारत अपनी खुद की मशीनों का विकास करेगा। उन्होंने घरेलू विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ावा देने और विदेशी निर्भरता को कम करने के लिए भारत की नीति पर जोर दिया। दिल्ली के किरोड़ीमल कॉलेज में 'यंग लीडर्स डिस्कोर्स फोरम' के दौरान गोयल ने घरेलू तकनीक और नवाचार को बढ़ावा देने के प्रयासों का उल्लेख किया, विशेषकर टनल बोरिंग मशीनों और दुर्लभ मृदा तत्वों के क्षेत्र में।


उन्होंने कहा कि टनल बोरिंग मशीनों के मामले में भारत का दृष्टिकोण अलग है। जबकि कई देश समझौते करने के लिए झुक सकते हैं, भारत अपने रिश्तों को खराब नहीं करना चाहता। गोयल ने कहा कि यदि चीन टनल बोरिंग मशीनें देने से मना करता है, तो भारत इन्हें खुद विकसित करेगा। उन्होंने याद दिलाया कि जब चीन ने 'रेयर अर्थ' की आपूर्ति पर रोक लगाई थी, तब भारत ने किसी से गिड़गिड़ाने का सहारा नहीं लिया।


गोयल ने यह भी बताया कि भारतीय स्टार्टअप्स ने 'रेयर अर्थ' के बिना उच्च गुणवत्ता वाली मोटरों का विकास शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि भारत अब बाहरी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भर रहने के बजाय, आयातित तकनीकों के विकल्प विकसित करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।


केंद्रीय मंत्री ने यह भी बताया कि भारत के निर्यात-उन्मुख क्षेत्रों में कपड़ा, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ, समुद्री उत्पाद, जूते-चप्पल, चमड़ा, रत्न और आभूषण, तथा फार्मास्यूटिकल्स शामिल हैं, जहां देश विशेष बाजार पहुंच की मांग कर रहा है।


गोयल ने व्यापार समझौतों में भारत के 'ऑफेंसिव' सेक्टरों की चर्चा की, जिसमें टेक्सटाइल, प्रोसेस्ड फूड, मछली और समुद्री उत्पाद शामिल हैं। उन्होंने कहा कि भारत कृषि और डेयरी क्षेत्रों में विदेशी प्रतिस्पर्धा के प्रति सतर्क है और जेनेटिकली मॉडिफाइड उत्पादों के खिलाफ सुरक्षा उपाय बनाए रखता है।