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भारत में डिजिटल करेंसी e₹ का आगाज़: UPI ट्रांजैक्शन पर MDR शुल्क में बदलाव

भारत में डिजिटल अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव आ रहा है, जिसमें 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर MDR शुल्क लागू होगा। इस बीच, RBI ने अपनी नई डिजिटल करेंसी e₹ की शुरुआत की है, जो व्यापारियों के लिए MDR शुल्क की समस्या का समाधान प्रदान कर सकती है। जानें e₹ के बारे में और यह UPI से कैसे भिन्न है, साथ ही इसके उपयोग के फायदे और विशेषताएँ।
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डिजिटल अर्थव्यवस्था में बदलाव

भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन देखने को मिल रहा है। 15 अक्टूबर से, 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) शुल्क लागू होगा। व्यापारी संघों और फिनटेक कंपनियों ने इस शुल्क को त्योहारी सीजन के मद्देनजर 1 जनवरी 2027 तक स्थगित करने की मांग की है। इसी समय, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी 'सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी' (CBDC) यानी ई-रुपया (e₹) की शुरुआत 15 अक्टूबर से करने की घोषणा की है। इसे पहले बैंकों के बीच परीक्षण के लिए रखा गया था, लेकिन अब यह दैनिक लेनदेन में बदलाव लाने के लिए पूरी तरह तैयार है.


व्यापारियों की चिंता

डिजिटल लेनदेन की बढ़ती गति के बीच, व्यापारियों की सबसे बड़ी चिंता MDR शुल्क है। उनका मानना है कि RBI का यह नया ई-रुपया इस समस्या का स्थायी और प्रभावी समाधान प्रदान करेगा.


e₹ और UPI में अंतर

e₹ भारत की भौतिक मुद्रा का डिजिटल संस्करण है, जिसे सीधे रिजर्व बैंक द्वारा जारी किया जाता है। जैसे 100 या 500 रुपये का नोट RBI की कानूनी देनदारी है, वैसे ही ई-वॉलेट में रखा e₹ भी इसका डिजिटल रूप है। सामान्य UPI या क्रेडिट/डेबिट कार्ड लेनदेन में धन एक बैंक खाते से दूसरे बैंक खाते में बिचौलियों के माध्यम से स्थानांतरित होता है, जबकि e₹ में भुगतान सीधे दो ई-वॉलेट के बीच होता है.


MDR शुल्क से बचाव

डिजिटल भुगतान पर बैंकों और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स MDR के रूप में शुल्क लेते हैं, जो व्यापारियों के लाभ को प्रभावित करता है। RBI के नियमों के अनुसार, e₹ और इसके वॉलेट के उपयोग पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। e₹ में वॉलेट-टू-वॉलेट ट्रांसफर सीधे RBI के बही-खाते में दर्ज होता है, जिससे व्यापारी को कोई अतिरिक्त कमीशन नहीं देना पड़ता.


e₹ के विशेष तथ्य

सामान्य ई-वॉलेट को बैंक खाते से जोड़ा जाता है, जबकि प्रोग्रामेबल e₹ को लाभार्थी बिना बैंक खाते के भी अपने मोबाइल से प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा, शून्य इंटरनेट वाले क्षेत्रों के लिए 'ऑफलाइन फीचर' पर काम किया जा रहा है। e₹ पर कोई ब्याज नहीं दिया जाता, और यदि फोन खो जाता है, तो उसी सिम के जरिए धन को सुरक्षित रूप से पुनर्प्राप्त किया जा सकता है.


आगामी लॉन्च

15 अक्टूबर से यह डिजिटल करेंसी पूरे देश में लॉन्च की जाएगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि इसका उपयोग कितना लाभकारी साबित होता है। RBI का मानना है कि इससे ऑनलाइन और ऑफलाइन भुगतान के तरीकों में क्रांति आएगी, और लोग MDR शुल्क से बच सकेंगे.