भारत में थोक महंगाई ने मई में नया रिकॉर्ड बनाया
मई 2023 में भारत में थोक महंगाई दर 9.68 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो अप्रैल में 8.26 प्रतिशत थी। ईंधन और ऊर्जा की कीमतों में वृद्धि के कारण यह नया रिकॉर्ड बना है। वाणिज्य मंत्रालय ने नए आंकड़े जारी किए हैं, जिसमें थोक मूल्य सूचकांक की आधार वर्ष श्रृंखला को भी अपडेट किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में तनाव और ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता के चलते महंगाई में वृद्धि हुई है। हालांकि, जून में कुछ राहत की उम्मीद जताई जा रही है।
| Jun 15, 2026, 20:35 IST
महंगाई दर में वृद्धि का नया रिकॉर्ड
भारत में थोक महंगाई ने मई में एक नया उच्च स्तर छू लिया है। ईंधन, ऊर्जा और कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के कारण थोक महंगाई दर 9.68 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो अप्रैल में 8.26 प्रतिशत थी। यह नई श्रृंखला के तहत अब तक का सबसे ऊंचा आंकड़ा है।
वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़े
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने सोमवार को मई माह के थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित महंगाई के आंकड़े जारी किए। मंत्रालय ने थोक मूल्य सूचकांक की आधार वर्ष श्रृंखला को भी अपडेट किया है, जो पहले 2011-12 थी और अब इसे 2022-23 कर दिया गया है। यह पिछले नौ वर्षों में पहला बड़ा संशोधन है।
नई श्रृंखला में बदलाव
नई श्रृंखला में वस्तुओं की संख्या 697 से बढ़ाकर 957 कर दी गई है। इसके साथ ही, सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और परमाणु ऊर्जा जैसे नए ऊर्जा स्रोतों को भी शामिल किया गया है। सरकार ने पहली बार उत्पादक मूल्य सूचकांक भी जारी किया है, जिससे उद्योगों में कच्चे माल और तैयार उत्पादों की कीमतों में बदलाव को समझना आसान होगा।
महंगाई के कारण
विशेषज्ञों का मानना है कि मई में महंगाई में वृद्धि का मुख्य कारण पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और ऊर्जा बाजार में उत्पन्न अनिश्चितता है। भारत अपनी आवश्यकताओं का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है, और इसका एक बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आता है। इस मार्ग पर बढ़े तनाव का सीधा असर वैश्विक तेल कीमतों पर पड़ा है।
ईंधन और ऊर्जा में महंगाई
ईंधन और ऊर्जा समूह में महंगाई दर अप्रैल के 24.89 प्रतिशत से बढ़कर मई में 30.33 प्रतिशत हो गई है। वहीं, कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस से जुड़ी महंगाई 56.31 प्रतिशत से बढ़कर 61.51 प्रतिशत हो गई है। मंत्रालय के अनुसार, खनिज तेल, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रसायन उद्योग और मूल धातु क्षेत्र मई में महंगाई के प्रमुख कारक रहे हैं।
खाद्य वस्तुओं पर प्रभाव
ऊर्जा कीमतों में वृद्धि का असर खाद्य वस्तुओं पर भी दिखाई देने लगा है। खाद्य पदार्थों की महंगाई अप्रैल के 2.43 प्रतिशत से बढ़कर मई में 3.60 प्रतिशत तक पहुंच गई है। वहीं, विनिर्मित उत्पादों में महंगाई दर 6.68 प्रतिशत से बढ़कर 7.48 प्रतिशत हो गई है।
खुदरा महंगाई में वृद्धि
इस बीच, खुदरा महंगाई भी लगातार दूसरे महीने बढ़ी है। मई में खुदरा महंगाई 3.93 प्रतिशत रही, जो अप्रैल में 3.48 प्रतिशत थी। हालांकि, थोक महंगाई अभी भी खुदरा महंगाई की तुलना में अधिक बनी हुई है।
भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति
भारतीय रिजर्व बैंक मुख्य रूप से खुदरा महंगाई को ध्यान में रखकर अपनी मौद्रिक नीति निर्धारित करता है। सरकार ने रिजर्व बैंक को चार प्रतिशत महंगाई का लक्ष्य दिया है, जिसमें दो प्रतिशत ऊपर और नीचे की सीमा निर्धारित की गई है। हाल ही में, रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष के लिए अपने महंगाई अनुमान को 4.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत कर दिया था।
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि
मौजूदा जानकारी के अनुसार, मई के दूसरे पखवाड़े में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में प्रति लीटर 7.50 रुपये तक की वृद्धि हुई थी। इसका असर आने वाले महीनों में परिवहन लागत और उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों पर भी दिखाई दे सकता है।
जून में राहत की उम्मीद
विशेषज्ञों को हालांकि जून में कुछ राहत की उम्मीद है। इक्रा के प्रधान अर्थशास्त्री राहुल अग्रवाल का कहना है कि पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और वैश्विक ऊर्जा कीमतों में नरमी आने से जून में थोक महंगाई पर दबाव कम हो सकता है। वहीं, इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च की मेघा अरोड़ा के अनुसार, जून में थोक महंगाई मामूली घटकर 9.3 प्रतिशत रह सकती है, लेकिन इसे पुराने स्तरों पर लौटने में अभी समय लगेगा। उन्होंने यह भी कहा कि अल नीनो की आशंका के कारण मानसून पर दबाव बना हुआ है, जिससे खाद्य कीमतें निकट भविष्य में ऊंची बनी रह सकती हैं।
