भारत में नवीकरणीय ऊर्जा में अभूतपूर्व निवेश और विकास
नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में निवेश की वृद्धि
नई दिल्ली, 2 नवंबर - केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने सोमवार को बताया कि पिछले दो वर्षों में भारत के नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में 67 अरब डॉलर का निवेश हुआ है, जो किसी एक क्षेत्र में सबसे बड़ा निवेश माना जा रहा है। जोशी ने भारत नवीकरणीय ऊर्जा (बीआरई) शिखर सम्मेलन एवं प्रदर्शनी 2026 में कहा कि यह क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहा है और भविष्य में देश की बिजली की मांग को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, भारत की गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा क्षमता 310 गीगावाट तक पहुंच गई है, जो सितंबर 2024 में 200 गीगावाट से अधिक है।
गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता में वृद्धि
जोशी ने कहा कि पिछले दो वर्षों में गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा क्षमता में 110 गीगावाट की वृद्धि हुई है, जो 50 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्शाती है। उन्होंने निवेशकों से भारत में निवेश जारी रखने और देश के विकास में भागीदार बनने का आग्रह किया।
उन्होंने यह भी बताया कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, और विभिन्न एजेंसियों ने देश की आर्थिक वृद्धि के अनुमान को 7 प्रतिशत तक संशोधित किया है।
सौर और पवन ऊर्जा में प्रगति
जोशी के अनुसार, भारत की सौर ऊर्जा क्षमता 2014 में 2.8 गीगावाट से बढ़कर 171 गीगावाट हो गई है। इसी तरह, पवन ऊर्जा क्षमता 21 गीगावाट से बढ़कर 60 गीगावाट, सौर मॉड्यूल विनिर्माण क्षमता 2 गीगावाट से 225 गीगावाट और सौर सेल विनिर्माण क्षमता शून्य से 45 गीगावाट तक पहुंच गई है।
पवन टर्बाइन विनिर्माण क्षमता भी 10 गीगावाट से बढ़कर 24 गीगावाट हो गई है।
उपभोक्ताओं के लिए सस्ती नवीकरणीय ऊर्जा
जोशी ने कहा कि उपभोक्ताओं को कम दरों पर नवीकरणीय ऊर्जा उपलब्ध कराने में भी सुधार हुआ है। 2014 में सौर ऊर्जा की दर 5.50 रुपये प्रति यूनिट थी, जो अब घटकर 2.15 रुपये प्रति यूनिट हो गई है। वहीं, सौर ऊर्जा और बैटरी से मिलने वाली बिजली की दर आज 2.70 रुपये प्रति यूनिट है।
हरित हाइड्रोजन में भारत की अग्रणी स्थिति
जोशी ने बताया कि भारत में हरित हाइड्रोजन की कीमत 279 रुपये और हरित अमोनिया की कीमत 49.75 रुपये प्रति किलोग्राम है। भारतीय कंपनियों ने हरित हाइड्रोजन की खरीद के लिए कई करार किए हैं, जिनके तहत सालाना 5.5 लाख टन से अधिक हरित हाइड्रोजन की आपूर्ति की जाएगी।
इससे भारत हरित हाइड्रोजन की आपूर्ति में विश्व में अग्रणी बन गया है। उन्होंने कहा कि इस साल 18 समझौतों के तहत हरित हाइड्रोजन की चार लाख टन सालाना से अधिक आपूर्ति के लिए करार किए गए हैं।
हरित हाइड्रोजन परियोजनाओं का निवेश
जोशी के अनुसार, 2023 में राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन की शुरुआत के बाद से अब तक हरित हाइड्रोजन की करीब 5.5 लाख टन सालाना आपूर्ति के लिए लगभग 23 समझौते किए जा चुके हैं। इनमें से 70 प्रतिशत से अधिक मात्रा निर्यात के लिए निर्धारित है।
उन्होंने कहा कि इन हरित हाइड्रोजन परियोजनाओं से लगभग 90,000 करोड़ रुपये का कुल निवेश आने की उम्मीद है।
