भारत में प्रदूषण के कारण उभरते आर्थिक अवसर
प्रदूषण: स्वास्थ्य संकट से आर्थिक बाजार तक
भारत में जब प्रदूषण का स्तर बढ़ता है, तो यह केवल स्वास्थ्य के लिए खतरा नहीं बनता, बल्कि एक बड़ा आर्थिक बाजार भी विकसित करता है। इसे अर्थशास्त्र में 'असुविधा का व्यापार' कहा जाता है। डलबर्ग एडवाइजर्स और CII की एक रिपोर्ट के अनुसार, एयर पॉल्यूशन के कारण भारत को हर साल लगभग 7 लाख करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान होता है। इसके विपरीत, प्रदूषण से बचने और इसे नियंत्रित करने के लिए कई क्षेत्रों में बाजार तेजी से बढ़ रहा है।
कंज्यूमर प्रोटेक्शन मार्केट
यह बाजार आम जनता के लिए है, जहां लोग प्रदूषण से बचने के लिए विभिन्न उत्पाद खरीदते हैं। 2025 तक भारत का एयर प्यूरिफायर बाजार लगभग 904 करोड़ रुपये (USD 108 मिलियन से अधिक) तक पहुंचने का अनुमान है, जो 13.5% से 16.3% की वार्षिक दर से बढ़ रहा है। विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों में इसकी पहुंच 5% को पार कर गई है, और उत्तर भारत, विशेषकर दिल्ली-NCR में, कुल मांग का 70% हिस्सा है। प्रमुख कंपनियों में Dyson, Philips, Xiaomi, Eureka Forbes, Honeywell, Daikin, और Sharp शामिल हैं।
कारखानों के लिए नियम
सरकार के सख्त नियमों के कारण फैक्ट्रियों को प्रदूषण नियंत्रण उपकरण स्थापित करने पड़ते हैं। भारत में प्रदूषण रोकने के लिए कई उपाय किए जाते हैं, और 2025 तक इस उपकरणों का बाजार लगभग 26,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने की उम्मीद है। पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत उद्योगों पर सख्ती के कारण, यह 2034 तक लगभग 5 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। प्रमुख कंपनियों में Thermax India, GE, Siemens, Honeywell, Babcock & Wilcox, और Ducon Technologies शामिल हैं।
ग्रीन ट्रांसपोर्टेशन और मोबिलिटी
गाड़ियों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए यह भारत का सबसे तेजी से बढ़ता हुआ बाजार है, जिसे सरकारी नीतियों का समर्थन प्राप्त है। 2016 में 50,000 गाड़ियों से बढ़कर, 2025 में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री 23 लाख सालाना को पार कर गई है। दिल्ली सरकार ने प्रदूषण से लड़ने के लिए 150 अरब रुपये की नई EV नीति लागू की है, जिसमें चार्जिंग स्टेशनों की संख्या को 9,000 से बढ़ाकर 32,000 किया जा रहा है।
हेल्थकेयर और फार्मास्युटिकल
प्रदूषण का सबसे पहला और सीधा असर मानव स्वास्थ्य पर पड़ता है, जिससे दवाओं और चिकित्सा सेवाओं का बाजार बढ़ता है। अक्टूबर से फरवरी के बीच उत्तर भारत में अस्थमा इनहेलर्स, कफ सिरप, एंटी-एलर्जिक दवाओं और नेबुलाइजर्स की बिक्री में 30% से 40% तक की वृद्धि होती है। प्रमुख कंपनियों में Cipla, Sun Pharma, और Lupin शामिल हैं।
नए उभरते बाजार
भारत सरकार ने 'नेशनल कार्बन मार्केट' की शुरुआत की है, जिसके तहत कंपनियां अपने प्रदूषण उत्सर्जन को कम करके कार्बन क्रेडिट खरीद और बेच सकती हैं। यह भविष्य में अरबों डॉलर का बाजार बनने की संभावना है। राज्य सरकारें और म्युनिसिपल कॉरपोरेशन एंटी-स्मॉग गन और स्मॉग टावर्स के लिए टेंडर जारी कर रहे हैं, जिससे निर्माण और इंजीनियरिंग कंपनियों के लिए नए सरकारी कॉन्ट्रैक्ट्स का बाजार बन रहा है।
मुख्य सरकारी नीतियां
सरकार एयर पॉल्यूशन को नियंत्रित करने के लिए कई नीतियां लागू करती है, जिसका लाभ कंपनियों को मिलता है। नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (NCAP) के तहत 130 से अधिक प्रदूषित शहरों को एयर क्वालिटी सुधारने के लिए फंड दिया जाता है। दिल्ली-NCR में प्रदूषण बढ़ने पर ग्रैडिड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) जैसे नियम लागू होते हैं, जिससे क्लीन-फ्यूल का बाजार बढ़ता है।
