भारत में यूरोपीय कंपनियों का बढ़ता निवेश: पीयूष गोयल की घोषणा
भारत में निवेश के अवसर
(राजेश राय) बर्लिन, 23 अक्टूबर - वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को बताया कि कई यूरोपीय कंपनियों ने भारत में निवेश में रुचि दिखाई है, विशेषकर कार निर्माता कंपनियों ने यहां विनिर्माण के अवसरों की खोज शुरू कर दी है। मंत्री ने अपनी आधिकारिक यात्रा के दौरान संवाददाताओं से कहा कि जर्मनी की कंपनियां स्वास्थ्य सेवा, औषधि, और अनुसंधान एवं विकास के क्षेत्रों में निवेश करने के लिए उत्सुक हैं। उन्होंने कहा, "यूरोपीय संघ (ईयू) द्वारा बढ़ाए जा रहे नियामकीय बोझ को देखते हुए, यूरोप के विनिर्माण क्षेत्र को ऐसे विश्वसनीय साझेदार देशों की तलाश करनी होगी, जहां उत्पादन की लागत कम हो।"
गोयल ने आगे कहा, "इसलिए, मुझे भारत में अपार संभावनाएं और रोजगार सृजन की उम्मीद है।" उन्होंने बताया कि यूरोपीय संघ कई नए नियम लागू कर रहा है, जैसे कि कार्बन सीमा समायोजन तंत्र (सीबीएएम) और वनों की कटाई से संबंधित नियम। भारतीय इस्पात उद्योग हरित इस्पात में भारी निवेश कर रहा है और स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों का उपयोग बढ़ा रहा है।
मंत्री ने कहा कि कई वाहन निर्माता कंपनियां भी भारत में विनिर्माण पर विचार कर रही हैं। यूरोप की कई प्रमुख कार कंपनियों ने भारत में विनिर्माण संयंत्र स्थापित किए हैं, जिससे घरेलू और निर्यात बाजारों की आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके। जर्मनी की फॉक्सवैगन, मर्सिडीज-बेंज, बीएमडब्ल्यू और ऑडी जैसी कंपनियां भारत में सक्रिय हैं। गोयल ने कहा, "हम भारत से लगभग 10 लाख कारों का निर्यात करते हैं।"
उन्होंने यह भी बताया कि जर्मनी की कंपनियों ने द्विपक्षीय बैठकों में भारत में बड़े निवेश की योजनाओं का उल्लेख किया है। एक कंपनी, जिसका नाम नहीं लिया गया, ने भारत में अपने कारोबार को चार अरब यूरो से बढ़ाकर 10 अरब यूरो करने की योजना बनाई है।
इस संवाददाता सम्मेलन में जर्मनी में भारत के राजदूत अजीत गुप्ते ने कहा कि पिछले ढाई साल में जर्मनी की कंपनियों ने भारत में 7.4 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश की घोषणा की है। गोयल ने बताया कि भारत-यूरोपीय संघ व्यापार समझौता दोनों पक्षों के लिए व्यापार और निवेश के अवसरों को बढ़ाएगा।
उन्होंने कहा कि इस समझौते पर इस साल के अंत तक हस्ताक्षर होने की उम्मीद है और यह 2027 की पहली तिमाही में लागू होगा। गोयल ने कहा, "मुक्त व्यापार समझौता केवल आयात शुल्क में कटौती के बारे में नहीं है, बल्कि यह निश्चितता और पूर्वानुमान की क्षमता का प्रतीक है।"
उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करेगा कि आपूर्ति श्रृंखलाएं खुली रहेंगी। गोयल ने कहा, "वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता के बीच, भरोसेमंद साझेदारियां भविष्य को आकार देंगी।"
उन्होंने भारत की उत्पादन क्षमता और यूरोप की प्रौद्योगिकी के संयोजन को एक मजबूत प्रतिस्पर्धात्मकता का स्रोत बताया। लालफीताशाही को कम करने के प्रयासों के बारे में पूछे जाने पर, गोयल ने कहा कि सरकार कई छोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने और अनुपालन संबंधी बोझ को कम करने के लिए कदम उठा रही है।
जर्मनी की संघीय आर्थिक मामलों एवं ऊर्जा मंत्री कैथरीना आर. ने दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का सुझाव दिया। सीबीएएम पर चर्चा करते हुए, गोयल ने कहा कि भारत और यूरोपीय संघ इस मुद्दे पर सौहार्दपूर्ण समाधान पर पहुंच गए हैं।
उन्होंने कहा, "भारत पर इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, क्योंकि हम अपनी अर्थव्यवस्था को तेजी से कार्बन उत्सर्जन से मुक्त कर रहे हैं।" गोयल ने कहा कि भारत, यूरोप को निर्यात करने वाले उद्योगों को कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने में मदद करेगा।
जर्मनी में भारतीयों के लिए रोजगार के अवसरों के बारे में पूछे जाने पर, गोयल ने कहा कि वहां कई अवसर हैं और जर्मन कंपनियां हजारों लोगों को नौकरी पर रखने के इच्छुक हैं। उन्होंने भारतीय विद्यार्थियों को जर्मन भाषा सीखने और वहां की संस्कृति से परिचित होने की सलाह दी।
गोयल ने कहा कि विदेश मंत्रालय, कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय मिलकर जर्मन भाषा सिखाने के लिए अधिक केंद्र स्थापित करने पर काम कर रहे हैं। वर्तमान में जर्मनी की 2,000 से अधिक कंपनियां भारत में सक्रिय हैं। जर्मनी भारत का 10वां सबसे बड़ा निवेशक है।
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत को 49.5 करोड़ अमेरिकी डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) मिला है। अप्रैल 2000 से जून 2026 के बीच भारत को जर्मनी से 15.84 अरब अमेरिकी डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश प्राप्त हुआ है।
