भारत में रोजगार बाजार: बेरोजगारी दर में मामूली सुधार और महिलाओं की भागीदारी में वृद्धि
रोजगार बाजार की नई तस्वीर
हाल के आंकड़ों ने देश के रोजगार बाजार की स्थिति को स्पष्ट किया है। सांख्यिकी मंत्रालय के अनुसार, अप्रैल से जून 2026 की तिमाही में बेरोजगारी दर 5.5 प्रतिशत पर आ गई है। इस दौरान काम करने वाली आबादी का अनुपात लगभग स्थिर बना रहा है। आंकड़ों में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच कुछ महत्वपूर्ण भिन्नताएँ भी देखने को मिली हैं।
बेरोजगारी दर में हल्का सुधार
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल से जून 2026 में बेरोजगारी दर 5.5 प्रतिशत रही, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 5.6 प्रतिशत थी। इस प्रकार, एक वर्ष में स्थिति में कोई बड़ा परिवर्तन नहीं आया। जून 2026 में वर्कर पॉपुलेशन रेश्यो 51.4 प्रतिशत रहा, जो कि जून 2025 के 51.2 प्रतिशत से थोड़ा अधिक है। कुल लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट भी 54.4 प्रतिशत दर्ज किया गया।
शहरी रोजगार की स्थिति
शहरी रोजगार बाजार में भी कोई बड़ा परिवर्तन नहीं देखा गया, हालांकि बेरोजगारी दर में कुछ कमी आई है। जून 2025 में शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी दर 7.1 प्रतिशत थी, जो अब घटकर 6.6 प्रतिशत हो गई है। दूसरी ओर, ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी लगभग स्थिर बनी हुई है। यह संकेत देता है कि शहरी क्षेत्रों में रोजगार की स्थिति में मामूली सुधार हुआ है, लेकिन इसे बड़े बदलाव के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
ग्रामीण महिलाओं की श्रम भागीदारी में वृद्धि
आंकड़ों का एक महत्वपूर्ण पहलू महिलाओं की श्रम भागीदारी से संबंधित है। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं का लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट जून 2026 में बढ़कर 36.6 प्रतिशत हो गया, जबकि पिछले वर्ष यह 35.2 प्रतिशत था। इस प्रकार, इसमें 1.4 प्रतिशत अंक की वृद्धि हुई है। इसके विपरीत, शहरी क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी 25.2 प्रतिशत से घटकर 24.8 प्रतिशत रह गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में वर्कर पॉपुलेशन रेश्यो भी 53.8 प्रतिशत रहा।
कामकाजी लोगों की संख्या
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल से जून 2026 के बीच 15 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लगभग 56.6 करोड़ लोग काम कर रहे थे। इनमें पुरुषों की संख्या लगभग 40.2 करोड़ और महिलाओं की संख्या करीब 16.4 करोड़ रही। मंत्रालय ने बताया कि यह आंकड़ा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के जनसंख्या संबंधी आंकड़ों के आधार पर तैयार किया गया है। कुल मिलाकर, आंकड़े यह दर्शाते हैं कि देश के रोजगार बाजार में पिछले एक वर्ष में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है, लेकिन ग्रामीण महिलाओं की भागीदारी में वृद्धि एक सकारात्मक संकेत है।
