भारत में विदेशी निवेश प्रक्रिया को सरल बनाने की योजना
सरकार की नई पहल
भारत की सरकार उन देशों से जुड़े विदेशी निवेश के लिए आवेदन प्रक्रिया को आसान बनाने पर विचार कर रही है, जो भारत के साथ भूमि सीमा साझा करते हैं। इस कदम का उद्देश्य उन विदेशी कंपनियों के लिए प्रक्रियात्मक बाधाओं को समाप्त करना है, जिनमें इन देशों के निवेशकों की हिस्सेदारी 10 प्रतिशत तक है। यह जानकारी मंगलवार को सूत्रों द्वारा साझा की गई।
प्रेस नोट 2 के तहत बदलाव
एक सूत्र ने बताया कि सरकार ‘प्रेस नोट 2’ के तहत आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाने की दिशा में काम कर रही है। इसके अंतर्गत उन प्रक्रियात्मक बाधाओं को समाप्त करने की योजना है, जिनके लिए सरकारी मंजूरी की आवश्यकता नहीं होती। मार्च में, सरकार ने ‘प्रेस नोट 2’ के माध्यम से चीन और अन्य देशों से जुड़े विदेशी निवेश के नियमों में ढील दी थी। इसके तहत, ऐसी विदेशी कंपनियों को भारत में पूर्व सरकारी मंजूरी के बिना निवेश करने की अनुमति दी गई, जिनमें इन देशों के निवेशकों की हिस्सेदारी 10 प्रतिशत तक है।
निवेश की नई शर्तें
पहले, भारत के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले देशों के किसी भी शेयरधारक की एक शेयर की भी हिस्सेदारी वाली विदेशी कंपनियों को भारत में निवेश के लिए सरकारी मंजूरी लेनी पड़ती थी। हालांकि, इन निवेशों पर एफडीआई नीति की अन्य सभी शर्तें लागू रहेंगी, जिसमें क्षेत्रवार सीमाएं और प्रवेश मार्ग से संबंधित नियम शामिल हैं।
उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग की भूमिका
ऐसे निवेश के लिए उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) को पहले से निर्धारित जानकारी भी प्रदान करनी होगी। इस बीच, स्वदेशीकरण के प्रयासों के तहत, डीपीआईआईटी ने 100 उत्पादों की सूची तैयार की है, जिनका उत्पादन पूरी तरह से देश में किया जाएगा। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि इस मामले पर अंतर-मंत्रालयी परामर्श पूरा हो चुका है।
स्टार्टअप फंड का क्रियान्वयन
संबंधित विभागों के साथ कार्ययोजना पर चर्चा जारी है। एक अन्य सूत्र ने बताया कि सरकार 10,000 करोड़ रुपये के ‘स्टार्टअप फंड ऑफ फंड्स 2.0’ के क्रियान्वयन में तेजी ला रही है। इस कोष से सरकार भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) में पंजीकृत वैकल्पिक निवेश कोषों (एआईएफ) को समर्थन देगी, जो आगे चलकर स्टार्टअप में निवेश करेंगे।
