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भारत में विदेशी निवेश में तेजी: 4,895 करोड़ रुपये के 29 प्रस्ताव

भारत ने विदेशी कंपनियों को, जिनकी चीन में 10 प्रतिशत तक हिस्सेदारी है, स्वचालित मार्ग से निवेश की अनुमति दी है। इसके परिणामस्वरूप, 4,895.65 करोड़ रुपये के 29 एफडीआई प्रस्ताव सामने आए हैं। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार, यह बदलाव निवेश प्रक्रिया को सरल और तेज बनाता है। जानें इस नई व्यवस्था के तहत निवेश के अवसर और संबंधित जानकारी।
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भारत में विदेशी निवेश की नई दिशा

भारत ने मई में विदेशी कंपनियों को, जिनकी चीन में 10 प्रतिशत तक हिस्सेदारी है, स्वचालित मार्ग से निवेश की अनुमति दी। इसके बाद से लगभग 4,895.65 करोड़ रुपये के 29 प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने शुक्रवार को इस संबंध में जानकारी साझा की।


मई से पहले, भारत के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले देशों की कंपनियों को निवेश के लिए सरकारी मंजूरी की आवश्यकता थी, भले ही उनकी हिस्सेदारी मामूली हो। सरकार ने संबंधित पक्षों की मांग पर एफडीआई नियमों में बदलाव किया। अब, 10 प्रतिशत तक चीन या हांगकांग की हिस्सेदारी वाली कंपनियां उन क्षेत्रों में स्वचालित रूप से निवेश कर सकती हैं, जहां इस मार्ग से एफडीआई की अनुमति है।


हालांकि, यह छूट केवल चीन, हांगकांग या भारत के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले अन्य देशों में पंजीकृत कंपनियों पर लागू नहीं होती। भारत के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले देशों में चीन, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, म्यांमार और अफगानिस्तान शामिल हैं। वित्त मंत्रालय ने इस संबंध में विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के तहत नियमों में बदलाव की अधिसूचना एक मई, 2026 को जारी की थी।


मंत्रालय ने बताया कि ये 29 निवेश प्रस्ताव सूचना प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सूचना एवं संचार, विनिर्माण, दवा, डेटा सेंटर और परिवहन सेवाओं जैसे विभिन्न क्षेत्रों से संबंधित हैं। निवेशकों का आधार मॉरीशस, अमेरिका, दक्षिण कोरिया, जापान, सिंगापुर, लक्जमबर्ग और केमैन आइलैंड्स जैसे विभिन्न देशों में फैला हुआ है। मंत्रालय ने कहा कि संशोधित व्यवस्था से पहले से सरकारी मंजूरी की आवश्यकता समाप्त होने से भारत में विदेशी निवेश का प्रवाह अधिक सुगम और तेज हुआ है।


इससे निवेशकों को अधिक निश्चितता मिली है, लेनदेन में लगने वाला समय कम हुआ है और कारोबारी सुगमता को बढ़ावा मिला है। मंत्रालय ने कहा कि 2026 के प्रेस नोट 2 और उसके बाद विदेशी मुद्रा प्रबंधन (गैर-ऋण साधन) नियम, 2019 में एक मई को अधिसूचित संशोधन के तहत लाभकारी स्वामित्व की जांच अब निवेशक इकाई के स्तर पर की जाती है। संबंधित जानकारी सरकार को देने के बाद निवेशक इकाई बिना किसी अन्य मंजूरी के स्वचालित मार्ग से निवेश कर सकती है।