भारत में विदेशी मुद्रा प्रवाह में वृद्धि: रिजर्व बैंक की नई पहल
भारतीय रिजर्व बैंक की नई पहल से विदेशी मुद्रा प्रवाह में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। विशेष विदेशी मुद्रा अदला-बदली सुविधा के तहत, विदेशी मुद्रा गैर निवासी जमा में रिकॉर्ड बढ़ोतरी देखी गई है। वित्त मंत्रालय के अनुसार, इस योजना का उद्देश्य रुपये पर दबाव कम करना और विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करना है। भारतीय स्टेट बैंक ने इस योजना के तहत सबसे अधिक जमा जुटाई है, जबकि अन्य प्रमुख बैंकों ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल भारत की आर्थिक स्थिरता में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
| Aug 3, 2026, 20:51 IST
विदेशी मुद्रा प्रवाह में सुधार के संकेत
भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा विदेशी मुद्रा प्रवाह को बढ़ावा देने के लिए उठाए गए कदमों का प्रभाव अब स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है। विशेष विदेशी मुद्रा अदला-बदली सुविधा, जो जून 2026 में शुरू की गई थी, के बाद से विदेशी मुद्रा गैर निवासी जमा में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। सरकार का मानना है कि इससे विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूती मिलेगी और रुपये पर दबाव कम होगा।
गैर निवासी जमा में अभूतपूर्व वृद्धि
वित्त मंत्रालय द्वारा लोकसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, 5 जून 2026 को विदेशी मुद्रा गैर निवासी जमा का कुल बकाया 32.56 अरब डॉलर था, जो 30 जुलाई 2026 तक बढ़कर 60.55 अरब डॉलर हो गया। इस अवधि में लगभग 86 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो भारतीय बैंकों और विदेशों में रहने वाले भारतीय जमाकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी को दर्शाती है।
विशेष विदेशी मुद्रा अदला-बदली सुविधा का उद्देश्य
भारतीय रिजर्व बैंक ने 8 जून 2026 से तीन से पांच वर्ष की अवधि वाले नए विदेशी मुद्रा गैर निवासी जमा के लिए विशेष विदेशी मुद्रा अदला-बदली सुविधा की शुरुआत की थी। यह योजना 16 अक्तूबर 2026 तक प्रभावी रहेगी और 8 जून से 30 सितंबर के बीच जुटाई गई जमा राशि पर लागू होगी। इसका मुख्य उद्देश्य देश में स्थिर विदेशी मुद्रा लाना और रुपये पर दबाव को कम करना है।
वित्त राज्य मंत्री का बयान
लोकसभा में एक प्रश्न के उत्तर में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि यह कदम देश में स्थिर विदेशी मुद्रा प्रवाह को आकर्षित करने और भारतीय रुपये को मजबूत करने के लिए उठाया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि विदेशी मुद्रा भंडार और बैंकिंग प्रणाली में तरलता इस योजना के तहत जुटाई गई कुल विदेशी मुद्रा पर निर्भर करेगी।
भारतीय स्टेट बैंक की प्रमुख भूमिका
जानकारी के अनुसार, भारतीय स्टेट बैंक इस योजना के तहत सबसे अधिक विदेशी मुद्रा गैर निवासी जमा जुटाने वाला बैंक बनकर उभरा है। 5 जून को बैंक के पास 9.70 अरब डॉलर का बकाया था, जो 30 जुलाई तक बढ़कर 13.82 अरब डॉलर हो गया। इस प्रकार, बैंक ने दो महीने से भी कम समय में 4.12 अरब डॉलर की वृद्धि की है।
अन्य प्रमुख बैंकों की भागीदारी
इसके बाद एचएसबीसी, आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक और एक्सिस बैंक का स्थान रहा। इन पांच प्रमुख बैंकों ने मिलकर कुल 60.55 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा गैर निवासी जमा राशि का बड़ा हिस्सा जुटाया है।
नियमों में छूट और विशेषज्ञों की राय
भारतीय रिजर्व बैंक ने इस योजना के तहत जुटाई गई नई पात्र जमा राशि को नकद आरक्षित अनुपात और वैधानिक तरलता अनुपात की अनिवार्यता से अस्थायी छूट दी है। सरकार का कहना है कि इस सुविधा की वास्तविक लागत विदेशी मुद्रा की कुल राशि, अवधि और भविष्य की विनिमय दर जैसे कारकों पर निर्भर करेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह अस्थायी पहल भारत की बाहरी वित्तीय स्थिति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
