भारत में विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए केंद्रीय वित्त मंत्री की घोषणाएं
विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए सरकार की पहल
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि केंद्र सरकार ने देश में विनिर्माण को प्रोत्साहित करने और विदेशी निर्भरता को कम करने के लिए आम बजट में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। सरकार उन उद्योगों को समर्थन दे रही है जो घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रहे हैं। सीतारमण ने ‘भारत शक्ति पॉन्डी लिट फेस्ट’ में एक संवाद सत्र के दौरान कहा, "भारत के निर्यात आंकड़े यह दर्शाते हैं कि चीन को हमारा निर्यात अभी भी पर्याप्त नहीं है।"
चीन को निर्यात की चुनौतियां
उन्होंने आगे कहा, "हालांकि, वास्तव में कुछ अधिक सामान चीन पहुंचता है, लेकिन ये उत्पाद पहले वियतनाम जाते हैं और फिर वहां से चीन पहुंचते हैं। इसलिए, यह निर्यात सीधे चीन को किए गए निर्यात के रूप में दर्ज नहीं होता।" सीतारमण ने स्पष्ट किया कि तकनीकी रूप से यदि हम चीन को निर्यात कर रहे हैं, तो इसे हमारे निर्यात के रूप में माना जाना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं होता।
भारत की बाजार पहुंच में कमी
सीतारमण ने यह भी बताया कि भारत को चीन के बाजार में उन उत्पादों के लिए पर्याप्त पहुंच नहीं मिलती, जिनका कारोबार मात्रा और मूल्य दोनों के लिहाज से बड़ा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि भैंस का मांस और जेनेरिक दवाएं ऐसे सामान हैं जिन्हें चीन भारत से खरीदता है, लेकिन सीधे नहीं। ये उत्पाद वियतनाम या अन्य देशों के माध्यम से वहां पहुंचते हैं।
विपक्ष की आलोचना
विपक्ष द्वारा जीडीपी के आंकड़ों पर उठाए गए सवालों पर सीतारमण ने कहा कि यह एजेंडा बुरी नीयत से प्रेरित है। उन्होंने कहा, "मुझे सबसे ज्यादा दुख इस बात से होता है कि वे भारत की विफलता समझी जाने वाली चीजों पर खुश होते हैं। यह देश और इसके लोग तमाम मुश्किलों के बावजूद अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास कर रहे हैं, और इसी कारण भारत तरक्की कर रहा है।"
मुफ्त योजनाओं पर विचार
सीतारमण ने मुफ्त योजनाओं और कल्याणकारी योजनाओं के संदर्भ में कहा कि यदि किसी योजना के लिए उचित बजट प्रावधान है और वह वित्तीय रूप से टिकाऊ है, तो उसे केवल ‘मुफ्त की रेवड़ी’ कहकर सनसनीखेज नहीं बनाया जाना चाहिए।
डिजिटल भुगतान पर स्पष्टीकरण
डिजिटल भुगतान के संबंध में उठी चिंताओं पर वित्त मंत्री ने कहा कि यूपीआई लेनदेन पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) कोई कर या उपकर नहीं है और इसकी राशि सरकार के खाते में नहीं जाएगी। उन्होंने बताया कि यह शुल्क व्यापारी और भुगतान सेवा प्रदाता के बीच रहेगा और इसका बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं डाला जाएगा।
