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भारत में सस्पेंशन ग्रेड पीवीसी रेजिन के आयात पर अंकुश का प्रभाव

भारत में सस्पेंशन ग्रेड पीवीसी रेजिन के आयात पर छह महीने के लिए अंकुश लगाया गया है, जिससे विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर प्रभाव पड़ने की संभावना है। इस कदम से घरेलू कीमतों में वृद्धि हो सकती है, जबकि आयात पर निर्भरता कम होने की उम्मीद नहीं है। जानें इस विषय पर और क्या जानकारी है और इसके संभावित प्रभाव क्या हो सकते हैं।
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सस्पेंशन ग्रेड पीवीसी रेजिन पर अंकुश

नई दिल्ली, 29 जुलाई: कम लागत वाले ‘सस्पेंशन ग्रेड पीवीसी रेजिन’ के आयात पर छह महीने के लिए लगाए गए प्रतिबंध से विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, जिससे देश में इस उत्पाद की कीमतें बढ़ने की संभावना है। यह चिंता आर्थिक शोध संस्थान जीटीआरआई ने बुधवार को व्यक्त की। ‘सस्पेंशन ग्रेड पीवीसी रेजिन’ का उपयोग पाइप और केबल जैसे प्लास्टिक उत्पादों के निर्माण में सबसे अधिक होता है।


विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने पिछले सप्ताह सस्पेंशन ग्रेड पॉलीविनाइल क्लोराइड (एस-पीवीसी) रेजिन पर न्यूनतम आयात मूल्य (एमआईपी) लागू किया है। इसके अनुसार, 0.76 डॉलर प्रति किलोग्राम या उससे कम कीमत वाले आयात के लिए अब लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा, जबकि इससे अधिक कीमत पर आयात सामान्य रूप से जारी रहेगा। यह व्यवस्था अगले छह महीनों तक प्रभावी रहेगी।


ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा कि इस निर्णय से घरेलू पीवीसी रेजिन की कीमतों में वृद्धि की संभावना है, लेकिन भारत की आयात पर निर्भरता में कमी आने की उम्मीद नहीं है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने इस उत्पाद का 1.63 अरब डॉलर का आयात किया, जिसमें चीन सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता रहा। इसके बाद जापान, ताइवान, दक्षिण कोरिया, मेक्सिको, इंडोनेशिया, थाईलैंड, अमेरिका, सिंगापुर और वियतनाम का स्थान है।


जीटीआरआई के अनुसार, इन देशों से आयात की औसत कीमत 0.65 डॉलर से 0.75 डॉलर प्रति किलोग्राम के बीच रही, जो डीजीएफटी द्वारा निर्धारित 0.76 डॉलर से कम है। ऐसे में मौजूदा आयात का एक बड़ा हिस्सा अब अंकुश की श्रेणी में आ जाएगा, जब तक कि आपूर्तिकर्ता कीमतें नहीं बढ़ाते। श्रीवास्तव ने कहा कि इस फैसले का मुख्य प्रभाव आयात में कमी के बजाय घरेलू कीमतों में वृद्धि के रूप में दिखाई देगा।


वर्तमान में एस-पीवीसी आयात पर 7.5 प्रतिशत सीमा शुल्क और 0.75 प्रतिशत सामाजिक कल्याण अधिभार लगाया जाता है। यदि पांच प्रतिशत आईजीएसटी जोड़ा जाए, तो न्यूनतम आयात लागत लगभग 0.87 डॉलर प्रति किलोग्राम हो जाती है। उन्होंने बताया कि भारत अपनी जरूरत का लगभग 64 प्रतिशत एस-पीवीसी रेजिन आयात करता है।


देश में इसकी वार्षिक खपत लगभग 47 लाख टन है, जिसमें एस-पीवीसी की हिस्सेदारी 45 लाख टन यानी 96 प्रतिशत है। घरेलू उत्पादन क्षमता केवल 17 लाख टन है, जिसमें रिलायंस इंडस्ट्रीज, केमप्लास्ट सनमार और डीसीएम श्रीराम प्रमुख उत्पादक हैं। इस कारण भारत को हर साल लगभग 30 लाख टन एस-पीवीसी रेजिन का आयात करना पड़ता है।