भारत में सेमीकंडक्टर उद्योग का विस्तार: वैश्विक कंपनियों की रुचि
भारत में सेमीकंडक्टर निवेश की नई संभावनाएं
सेमीकॉन इंडिया-2026 में, प्रमुख वैश्विक सेमीकंडक्टर कंपनियों ने भारत में अपने व्यवसाय और निवेश को बढ़ाने की इच्छा व्यक्त की है। ये कंपनियां भारत की कुशल कार्यबल और केंद्र एवं राज्य सरकारों की अनुकूल नीतियों का लाभ उठाकर सेमीकंडक्टर विनिर्माण और आपूर्ति श्रृंखला को विकसित करने की संभावनाएं तलाश रही हैं। लिथोग्राफी उपकरण बनाने वाली प्रमुख कंपनी एएसएमएल ने भारत में अपना कार्यालय खोला है।
कंपनी ने यह भी कहा है कि उसे उम्मीद है कि उसके अन्य ग्राहक भी भारत में विनिर्माण इकाइयां स्थापित करेंगे। एएसएमएल के मुख्य रणनीतिक सोर्सिंग एवं खरीद अधिकारी एलन वेन ने बताया कि टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स भारत में 300 मिलीमीटर की सेमीकंडक्टर फैब स्थापित करने वाली पहली कंपनी है, जिसकी उत्पादन क्षमता प्रति माह 50,000 वेफर है। वेन ने यह भी कहा कि यदि भारत में सेमीकंडक्टर विनिर्माण को बड़े पैमाने पर विकसित करना है, तो कई फैब स्थापित करने की आवश्यकता होगी।
उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, एएसएमएल के उपकरणों का चिप निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान है। वेन ने कहा कि कंपनी केवल अपने ग्राहकों को सहयोग देने के लिए ही नहीं, बल्कि वहां उपलब्ध प्रतिभाओं का लाभ उठाने के लिए भी काम कर रही है। भारत ने 2032 तक अपनी घरेलू सेमीकंडक्टर मांग का 15 से 25 प्रतिशत हिस्सा देश में निर्मित वेफर से पूरा करने का लक्ष्य रखा है।
इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आने वाले वर्षों में कई सेमीकंडक्टर फैब स्थापित होने की संभावना है। सरकार ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र के विकास के अगले चरण के लिए सेमीकॉन 2.0 योजना की घोषणा की है, जिसमें लगभग 1.27 लाख करोड़ रुपये (13.5 अरब डॉलर) के प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है।
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि इस योजना के तहत चिप उत्पादन से जुड़े लगभग 12 अरब डॉलर के निवेश प्रस्ताव आने की उम्मीद है। सेमीकंडक्टर उपकरण बनाने वाली कंपनी एप्लाइड मैटेरियल्स ने कार्यक्रम में अगले 10 वर्षों में भारत में पांच अरब डॉलर (करीब 48,000 करोड़ रुपये) के निवेश की प्रतिबद्धता जताई। इससे पहले, कंपनी ने कर्नाटक सरकार के साथ चिप निर्माण में उपयोग होने वाले उपकरणों के अनुसंधान, विकास और उत्पादन के लिए 3,600 करोड़ रुपये के निवेश का समझौता किया था।
एप्लाइड मैटेरियल्स की प्रतिद्वंद्वी लैम रिसर्च ने भी भारत में सिलिकॉन कलपुर्जा संयंत्र स्थापित करने के लिए 10,000 करोड़ रुपये के निवेश की घोषणा की। तीन दिवसीय आयोजन के दौरान लगभग 56 समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने गुजरात के धोलेरा में चिप निर्माण इकाई और असम में चिप असेंबली एवं परीक्षण इकाई स्थापित करने के लिए किए जा रहे 1.18 लाख करोड़ रुपये के निवेश को समर्थन देने के लिए विभिन्न आपूर्तिकर्ताओं के साथ 16 समझौते किए।
टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स धोलेरा में 363 एकड़ में एक औद्योगिक पार्क विकसित कर रही है, जिसमें उसके संयंत्र के लिए आवश्यक लगभग 450 ‘वेंडर’ को जगह देने की योजना है। कार्यक्रम में भारत की घरेलू चिप-डिजाइन कंपनियों ने भी अपनी योजनाएं प्रस्तुत कीं। एलएंडटी सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजीज, इंडिसेमिसी, एक्सिरो और अहीसा डिजिटल इनोवेशंस जैसी कई कंपनियों ने वाणिज्यिक स्तर पर चिप उत्पादन और कारोबार को बढ़ाने की योजनाओं की घोषणा की।
सरकार ने सेमीकॉन 2.0 के अगले चरण में भारत में चिप डिजाइन करने वाली कम से कम 200 स्टार्टअप इकाइयों और कंपनियों को प्रोत्साहित करने का लक्ष्य रखा है। सेमीकॉन इंडिया 2026 में 51,000 से अधिक पंजीकरण हुए, लगभग 40,000 लोगों ने भाग लिया और 600 से अधिक प्रदर्शकों ने इसमें हिस्सा लिया। इसमें लगभग 300 अंतरराष्ट्रीय कंपनियों की भागीदारी भी देखी गई।
