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भारत में हवाई यात्रा के लिए नई विमानन कंपनियों की आवश्यकता

भारत में हवाई यात्रा की संख्या तेजी से बढ़ रही है, जिससे तीन प्रमुख राष्ट्रीय विमानन कंपनियों की आवश्यकता महसूस हो रही है। अडानी एयरपोर्ट्स के CEO अरुण बंसल ने घरेलू विमानन क्षेत्र को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। उनका मानना है कि भारत को अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए बाजार खोलने से पहले अपनी कंपनियों को प्रतिस्पर्धी बनाना चाहिए। इसके अलावा, अडानी एयरपोर्ट्स ने अगले 7 वर्षों में 10 से 11 अरब डॉलर का निवेश करने की योजना बनाई है। जानें इस विषय पर और क्या कहा गया है।
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भारत में हवाई यात्रा का बढ़ता बाजार

भारत में हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों की संख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है। इस बढ़ती मांग को पूरा करने और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की सुविधा को बढ़ाने के लिए देश में तीन प्रमुख राष्ट्रीय विमानन कंपनियों की आवश्यकता है। यह विचार अडानी एयरपोर्ट्स के CEO अरुण बंसल ने व्यक्त किया। उन्होंने मंगलवार को कहा कि भारत को पहले अपने घरेलू विमानन क्षेत्र को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, उसके बाद ही विदेशी कंपनियों के लिए बाजार को खोलने पर विचार करना चाहिए।


तीसरी बड़ी विमानन कंपनी की आवश्यकता

अरुण बंसल ने बताया कि इंडिगो और एयर इंडिया को राष्ट्रीय विमानन कंपनियों में शामिल किया जा सकता है, लेकिन इनके समान आकार की एक तीसरी कंपनी की भी आवश्यकता है। उनका कहना है कि भारत जैसे विशाल बाजार में केवल दो बड़ी विमानन कंपनियों के सहारे भविष्य की मांग को पूरा करना संभव नहीं होगा। देश को ऐसी कंपनियों की आवश्यकता है, जिनके पास पर्याप्त विमान हों और जो वैश्विक विमानन समूहों की तरह सेवाएं प्रदान कर सकें।


अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए बाजार खोलने की नीति

बंसल ने अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए बाजार खोलने की नीति पर भी अपने विचार साझा किए। उनका मानना है कि भारत को पहले अपनी विमानन कंपनियों को मजबूत करने का अवसर देना चाहिए। जब तक घरेलू कंपनियां विमानों की संख्या, सेवाओं और कारोबार के आकार में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की स्थिति में नहीं पहुंचतीं, तब तक विदेशी कंपनियों के लिए बाजार को बड़े पैमाने पर खोलने से बचना चाहिए।


भारत का विमानन बाजार और भविष्य की संभावनाएं

भारत का विमानन बाजार दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते बाजारों में से एक है। बंसल के अनुसार, देश में हवाई यात्रियों की वार्षिक संख्या लगभग 300 मिलियन है, जो 2040 से 2045 के बीच 1.1 से 1.2 अरब तक पहुंच सकती है। इतनी बड़ी संख्या में यात्रियों की सेवा के लिए नए विमानों की आवश्यकता होगी, साथ ही हवाई अड्डों की क्षमता को भी बढ़ाना होगा।


अडानी एयरपोर्ट्स का निवेश और विकास योजनाएं

अडानी एयरपोर्ट्स ने अगले 7 वर्षों में भारत में 10 से 11 अरब डॉलर का निवेश करने की योजना बनाई है। यह राशि हवाई अड्डों के बुनियादी ढांचे, गैर-विमानन कारोबार और हवाई अड्डों के आसपास की सुविधाओं के विकास पर खर्च की जाएगी। वर्तमान में, कंपनी के हवाई अड्डों से हर साल लगभग 100 मिलियन यात्री यात्रा करते हैं, और अगले 10 वर्षों में इस संख्या को 300 मिलियन तक बढ़ाने का लक्ष्य है।


नवी मुंबई हवाई अड्डे का विकास

कंपनी सरकार की अगली हवाई अड्डा निजीकरण प्रक्रिया में भी भाग लेने की योजना बना रही है, जिसमें 11 हवाई अड्डों को निजी कंपनियों को सौंपने की योजना है। बंसल ने बताया कि नवी मुंबई हवाई अड्डे के दूसरे चरण का कार्य तेजी से चल रहा है, जिसका लक्ष्य 2030 तक सालाना 50 मिलियन यात्रियों को संभालने की क्षमता विकसित करना है।


मुंबई हवाई अड्डे का विकास

मुंबई के मौजूदा हवाई अड्डे पर टर्मिनल 1 का नया विकास किया जा रहा है। इसके पूरा होने पर, दोनों टर्मिनलों की कुल क्षमता 55 मिलियन से बढ़कर लगभग 65 मिलियन यात्रियों तक पहुंच जाएगी। बंसल ने कहा कि कंपनी का मुख्य ध्यान भारत में विस्तार पर रहेगा, और विदेशों में निवेश केवल तब किया जाएगा जब कोई उत्कृष्ट अवसर सामने आएगा।