भारतपे ने नए एमडीआर ढांचे का समर्थन किया, ग्रोवर के बयानों से खुद को अलग किया
भारतपे का नया एमडीआर ढांचा
भारतपे, एक वित्तीय प्रौद्योगिकी कंपनी, ने बृहस्पतिवार को यूपीआई के माध्यम से व्यापारियों के लेनदेन के लिए नए मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) ढांचे का समर्थन किया। इसके साथ ही, कंपनी ने अपने पूर्व सह-संस्थापक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) अशनीर ग्रोवर के बयानों से खुद को अलग कर लिया। भारतपे ने स्पष्ट किया कि ग्रोवर की टिप्पणियां कंपनी के दृष्टिकोण का प्रतिनिधित्व नहीं करती हैं और ये उनके व्यक्तिगत विचार हैं।
कंपनी के एक प्रवक्ता ने बताया, 'ग्रोवर का 2024 से भारतपे से कोई संबंध नहीं है और वह न तो कंपनी के शेयरधारक हैं और न ही किसी अन्य रूप में जुड़े हैं।' उन्होंने मीडिया से अनुरोध किया कि ग्रोवर के बयानों को कंपनी के साथ जोड़कर पेश न किया जाए। यह स्पष्टीकरण तब आया जब ग्रोवर ने सोशल मीडिया और उद्योग से जुड़े कार्यक्रमों में यूपीआई में एमडीआर में बदलाव की आलोचना की। ग्रोवर ने 'एक्स' पर लिखा, 'यूपीआई पर कोई भी एमडीआर भारत में उस एक चीज को खत्म कर देगा जो बिना किसी रुकावट के काम कर रही है, यानी मोबाइल भुगतान।'
उन्होंने इसे सरकार का एक प्रतिगामी कदम बताते हुए पुनर्विचार की आवश्यकता जताई। यूपीआई भुगतान की व्यवस्था, जो लगभग छह साल तक पूरी तरह नि:शुल्क रही, में बदलाव करने का निर्णय सरकार ने मंगलवार को लिया। नए नियमों के अनुसार, 15 अक्टूबर से व्यापारियों को 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर 0.4 प्रतिशत शुल्क देना होगा। यह शुल्क व्यापारियों को ही चुकाना होगा।
हालांकि, व्यक्ति-से-व्यक्ति (पी2पी) लेनदेन और छोटे भुगतान इस शुल्क से मुक्त रहेंगे। भारतपे ने ग्रोवर के विचारों से भिन्नता दर्शाते हुए कहा कि नया ढांचा डिजिटल भुगतान के आर्थिक आधार को मजबूत करेगा और उपभोक्ताओं तथा छोटे व्यापारियों के हितों की रक्षा करेगा। भारतपे के सीईओ नलिन नेगी ने कहा, 'नया एमडीआर ढांचा यह साबित करता है कि टिकाऊ और मजबूत भुगतान तंत्र विकसित करते हुए भी उपभोक्ताओं के लिए यूपीआई नि:शुल्क बना रहेगा।'
उपभोक्ताओं को यूपीआई के लिए कोई शुल्क नहीं देना होगा, जबकि पी2पीएम (व्यक्ति से कारोबारी) ढांचे के तहत सूक्ष्म और छोटे कारोबारी शून्य एमडीआर के दायरे में सुरक्षित रहेंगे। उन्होंने कहा कि यह ढांचा विशेष रूप से छोटे शहरों और कम सेवा वाले बाजारों में कारोबारी भुगतान स्वीकार्यता, बुनियादी ढांचे और डिजिटल भुगतान को अपनाने के विस्तार के लिए संसाधन उपलब्ध कराएगा।
