Newzfatafatlogo

भारतीय प्रौद्योगिकी सेवा उद्योग में एआई का बढ़ता प्रभाव

भारतीय प्रौद्योगिकी सेवा उद्योग में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है, जिससे 10-12 अरब अमेरिकी डॉलर का राजस्व अर्जित होने की उम्मीद है। नासकॉम के अनुसार, लगभग 25 प्रतिशत कंपनियों ने एआई को उत्पादन स्तर पर लागू किया है। इस फोरम में उद्योग के प्रमुखों ने एआई के महत्व को रेखांकित किया और भविष्य में इसके संभावित अवसरों पर चर्चा की। जानें कि कैसे एआई उत्पादकता बढ़ाने और नई मांगों को उत्पन्न करने में मदद कर रहा है।
 | 

एआई से राजस्व में वृद्धि

भारतीय प्रौद्योगिकी सेवा क्षेत्र को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित सेवाओं से 10 से 12 अरब अमेरिकी डॉलर का राजस्व प्राप्त होने की उम्मीद है। लगभग 25 प्रतिशत कंपनियों ने एआई के प्रयोगों को सफलतापूर्वक उत्पादन स्तर पर लागू किया है। यह जानकारी उद्योग संगठन नासकॉम ने शुक्रवार को साझा की।


न्यूयॉर्क में आयोजित नासकॉम यूएस सीईओ फोरम में उद्योग के प्रमुखों ने इस बात को खारिज किया कि एआई के आगमन से पारंपरिक सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) सेवाओं का महत्व कम होगा। उन्होंने कहा कि एआई के इस युग में भी आईटी क्षेत्र की भूमिका वैश्विक कंपनियों के विकास में महत्वपूर्ण बनी रहेगी।


उत्पादकता में वृद्धि और नई मांग

नासकॉम के अनुसार, एआई से उत्पादकता में वृद्धि होगी और मानकीकृत कार्यों का दायरा घटेगा। हालांकि, एआई के उपयोग के लिए डेटा को व्यवस्थित करने, अनुप्रयोगों के आधुनिकीकरण, विभिन्न तकनीकों के एकीकरण, साइबर सुरक्षा, और उद्योग-विशिष्ट समाधानों की मांग में वृद्धि होगी।


बयान में बताया गया है कि लगभग 25 प्रतिशत तकनीकी सेवा कंपनियों ने एआई प्रयोगों को उत्पादन स्तर पर लागू किया है। वर्तमान में इस क्षेत्र में 20 लाख से अधिक पेशेवर एआई कौशल से लैस हैं, जबकि 1 से 2 लाख पेशेवरों को उन्नत एआई क्षमताओं का विशेष प्रशिक्षण दिया गया है।


भविष्य की संभावनाएं

नासकॉम के अनुसार, 2030 तक एजेंटिक एआई प्रौद्योगिकी सेवा उद्योग के लिए 300 से 400 अरब डॉलर के अतिरिक्त व्यय अवसर प्रदान कर सकती है। इसमें पुरानी प्रणालियों का आधुनिकीकरण, एआई संचालन, और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्र शामिल हैं।


एजेंटिक एआई एक ऐसी प्रणाली है जो केवल निर्देशों का पालन नहीं करती, बल्कि लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए स्वयं योजना बनाती है और निर्णय लेती है।


फोरम में चर्चा

भारत के महावाणिज्य दूतावास में आयोजित इस फोरम में डेलावेयर के गवर्नर मैट मेयेर और अमेरिका में कार्यरत भारतीय प्रौद्योगिकी कंपनियों के सीईओ शामिल हुए। नासकॉम के अध्यक्ष राजेश नांबियार ने कहा कि जैसे-जैसे एआई का उपयोग बढ़ेगा, कंपनियों को ऐसे विशेषज्ञ भागीदारों की आवश्यकता होगी जो इस तकनीक को जिम्मेदारी से लागू कर सकें।


उन्होंने कहा कि कंपनियों को एआई मॉडल, अनुप्रयोगों, डेटा प्लेटफार्मों, और साइबर सुरक्षा नियंत्रण को एक विश्वसनीय परिचालन ढांचे में एकीकृत करना होगा। भविष्य में आईटी सेवाओं का महत्व इन सभी प्रणालियों को सुरक्षित और कुशलता से संचालित करने में होगा।